महेंद्रगढ़। जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं उनके साथी संगठनों की ओर से करवाई गई सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जिले के 103 गांवों में करवाई गई सर्वे में 30 अप्रैल से 10 मई तक 330 लोगों की मौत हो गई है। इनमें अधिकतर कोरोना संक्रमित मरीज रहे हैं और कुछ कोरोना संदिग्ध। इसके अलावा कुछ मौतें कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद हार्टअटैक से हुई हैं। 22 मौतें तो अकेले सतनाली बास गांव में हुई हैं। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार तो कोरोना की दूसरी लहर में 15 मई तक 97 लोगों की मौत हुई है।
बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जिले के अलग-अलग खंडों के गांवों में सर्वे किया। लगभग 103 टीमें इन गांवों को कवर करने में जुटी थीं। टीम ने गांवों में जाकर विभिन्न स्रोतों से फ्लू मरीजों तथा मौत के आंकड़े जुटाए। इसके अलावा कई गांवों में 50 प्रतिशत लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं और वो कोरोना जांच करवाने से बच रहे हैं। यह रिपोर्ट संघ की ओर से जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। (संवाद)
चार गांवों में दस से अधिक हो चुकी है मौत
गांवों की सर्वे में चार गांव सतनाली, पाली, आकोदा, भुंगारका आदि गांवों में दस-दस से अधिक मौत हो चुकी हैं। सतनाली बास गांव में सबसे अधिक 22 मौत हो चुकी है। 20 गांव ऐसे हैं जिनमें पांच-पांच मौत हो चुकी हैं। सर्वे में यह भी पता चला कि कुंभावली, दोस्तपुर, अगिहार, मालियों की ढाणी, सोलहा, जांजड़ियावास आदि गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक लोग खांसी, जुकाम बुखार से पीड़ित हैं।
लापरवाही के कारण फैल रहा संक्रमण
गांव में कोरोना संक्रमण बढ़ने का मुख्य कारण इलाज में लापरवाही बरतना रहा है। खांसी, जुकाम एवं बुखार से पीड़ित मरीज कोरोना जांच करवाने से बच रहे हैं। ऐसे में संक्रमण शरीर में फैल जाता और बाद में उसकी मौत हो जाती है। कई मरीज तो गांवों में झोलाछाप चिकित्सकों से ही दवाइयां ले रहे हैं जिनकी ओपीडी वर्तमान में तीन गुणा बढ़ गई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का मुख्य कारण
-ग्रामीण जांच में करवाने में लापरवाही कर रहे हैं।
-शहरों से लौट रहे हैं लोग बरत रहे है लापरवाही।
-सैंपल लेने के बाद निगरानी का अभाव
-दैनिक जरूरतों के लिए शहरी इलाकों में आना-जाना
-मास्क पहनने और शारीरिक दूरी में जमकर लापरवाही
-शादी, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सख्ती का अभाव
-पिछले साल के मुकाबले ज्यादा क्वारंटीन सेंटर नहीं होना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अलग-अलग 103 गांवों में जाकर सर्वे किया। जिसमें 30 अप्रैल से 10 मई तक आंकड़े एकत्रित किए गए। सर्वे में 330 लोग की मौत के बारे में पता चला है। अधिकतर मौत कोरोना संक्रमण, सस्पेक्टिड मरीज तथा कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक से हुई हैं।
-कैलाश पाली, जिला संयोजक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।
कुछ गांवों की रिपोर्ट संगठनों ने उनको सौंपी है। वो रिपोर्ट डीसी को सौंप दी गई है। अब सरकार की ओर से सर्वे करवाया जा रहा है। उस सर्वे को भी लिया है और बीडीपीओ से भी गांवों के आंकड़े मांगे गए हैं। इन सबको लेकर गांवों में स्क्रीनिंग करवा रहे हैं।
- अशोक कुमार, सिविल सर्जन, महेंद्रगढ़।
कस्बे में संक्रमित और सस्पेक्टिड 20 लोगों की मौत हो चुकी है। कस्बे में 10 बेड के दो आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। पूरे कस्बे को सैनिटाइज करवा दिया गया है। इसके अलावा लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
-होशियार सिंह, सरपंच प्रतिनिधि
आकोदा-खरखड़ा में 10 मई तक कोरोना व अन्य बीमारियों से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। 16 मई तक मृतकों की संख्या 17 हो गई है। ऐसे में गांव वालों को जागरूक किया जा रहा है व गांव को सैनिटाइज करवाया जा रहा है।
धर्मेंद्र, सरपंच।