अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
मानसून दक्षिणी भारत में दस्तक भी दे चुका है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ दिनों में मानसून प्रदेश में भी पहुंच जाएगा। वहीं, अबकी बार मौसम विभाग ने प्रदेश में सामान्य से अधिक बरसात की चेतावनी भी जारी की है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने भी अधिकारियों को बरसात के दौरान बाढ़ आदि आपदाओं से निपटने के लिए एडवाइजरी जारी की है। मगर शहर में अभी इस प्रकार की कोई तैयारी नहीं हुई हैं। जिसके कारण लोगों में अधिक बरसात के दौरान बाढ़ आदि का भय सताने लगा है। हालांकि प्रशासन द्वारा बरसाती पानी की निकासी के लिए शहर के बीचोंबीच मुख्य रूप से एक बड़ा गंदा नाला बनाया हुआ है।
मगर देखरेख के अभाव में नाला कई जगह से टूट गया है। इसके निर्माण के बाद से इसकी दो बार ही फौरी तौर पर मरम्मत हुई है। वहीं, यह गंदगी से भी अटा पड़ा है, परंतु प्रशासन ने अभी तक नाले की सफाई के लिए कोई तैयारी शुरू नहीं की है। ऐसे में कहीं ये बड़ा गंदा नाला स्वयं बाढ़ लाने में भी सहायक बन सकता है। बरसाती और शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए शहर के बीचोंबीच 20 वर्ष पूर्व गंदे नाले का निर्माण किया गया था। इससे पूर्व यहां पर छलक नदी बहती थी। जिस पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था। 1996 में शहर में आई बाढ़ के बाद नगर परिषद द्वारा इस नाले का निर्माण करवाया गया था। नाले के निर्माण के दौरान छलक नदी के बीच बने मकानों को भी हटाया गया था।
ढाई से तीन किलोमीटर लंबा है नाला
शहर के बीचोंबीच से गुजर रहा नाला पश्चिम में निजामपुर रोड के पास मोहल्ला सलामपुरा से शुरू होकर मोहल्ला महल, मिश्रवाड़ा, गस्तीवाड़ा, पुल बाजार, चांदुवाड़ा, शनि मंदिर, रामानंद राधेश्याम धर्मशाला, पुलिस लाइन व गोशाला रोड के साथ से होता हुआ रेवाड़ी रोड पर कैलाश नगर में जाकर समाप्त होता है। इस प्रकार नाला करीब ढाई से तीन किलोमीटर तक फैला हुआ है। उस समय नाले के निर्माण पर करीब 15 लाख रुपये का खर्चा आया था। लेकिन अब मरम्मत के अभाव में यह नाला जगह-जगह से टूट गया है। समय पर सफाई न होने के कारण इसमें झाड़ियां उगी हुई हैं और गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
सफाई के अभाव में हो चुके हैं बाढ़ जैसे हालात
नाले के निर्माण के बाद इसकी सफाई नहीं होने से तथा जगह-जगह से टूट जाने के कारण यह नाला ही बाढ़ लाने में सहायक हो गया था। निर्माण के दो साल बाद ही 1998 में नाले के हुए रिसाव से बाढ़ आ गई। वहीं 2005 व 2008 में भी इसकी वजह से इसके आसपास के मोहल्लों रविदास मंदिर मार्ग, जमालपुर, पुरानी सराय, दशमेश नगर, मीराजी व चांदुवाड़ा में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात हो चुके हैं।
सीवर निर्माण के समय कई जगह से टूट गया था नाला
शहर में 2012 में डाली गई बड़ी सीवर लाइन भी नाले के अंदर से ही डाली गई है। जिसके कारण यह नाला मोहल्ला महल, रविदास मंदिर के पास, पुल बाजार के पास, रामानंद राधेश्याम धर्मशाला के पास व गोशाला रोड पर रेवाड़ी रोड तक पूर्णतय यह नाला टूट गया था। जिसके बाद इस नाले की मरम्मत के लिए नगर परिषद ने दो बार 18 लाख रुपये का टेंडर भी छोड़ा, मगर दोनों ही बार ठेकेदार सरेंडर कर गए थे। जिसके कारण सीवर के निर्माण के चार साल बाद भी इसकी मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया है।
बोले लोग
नाले की सफाई न होने के कारण इसके आसपास रहने वाले लोगों का बुरा हाल है। काफी समय नाले की सफाई नहीं हुई है। इस कारण नाले के आस-पास दुर्गंध आती है।
- रविंद्र कुमार।
नाला कई जगह से टूट गया है। इसलिए नाले की सफाई के साथ नाले की मरम्मत भी करवानी चाहिए। ताकि बरसात के दिनों में पानी भर जाने से बाढ़ का खतरा न रहे।
- राकेश सैन।
बरसात से पहले नाले की सफाई होना बहुत जरूरी है। मानसून से पूर्व नाले की सफाई ठीक से करवाई जाए।
- मोहित जिंदल।
वर्जन
नाले की सफाई के लिए टेंडर जारी हो चुका है। वहीं, सफाई भी शुरू करवा दी गई है। मानसून शुरू होने से पूर्व ही छलक नाले की पूर्ण रूप से सफाई करवा दी जाएगी।
- अभय सिंह यादव, ईओ नगर परिषद नारनौल।