नहीं सुधर रहे हालात, नप की गोशाला में चार गायों की मौत
-एक ही रात मृत गायों को खा गए जंगली जानवर
-सुबह आननफानन में गोशाला के पास ही दफनाया गायों को
फोटो नंबर सात से 13
सुदेश कुमार
नारनौल। शहर की गोशालाओं में गायों के मरने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। श्री गोपाल गोशाला के बाद अब गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ी के नजदीक नगर परिषद की ओर से चलाई जा रही गोशाला में भी गायों की मौत हो रही है। इतना ही नहीं मृत गायों को समय पर नहीं दफनाए जाने के कारण जंगली जानवर उन्हें नोच-नोच कर खा गए। वहीं गायों की मौत के बाद लोगों में रोष है।
शुक्रवार सुबह इसकी सूचना जैसे ही अमर उजाला टीम को लगी तो संवाददाता नगर परिषद की ओर से रघुनाथपुरा की पहाड़ी के नजदीक चलाई जा रही गोशाला पहुंचे। वहां उन्होंने देखा की गोशाला में तीन-चार मृत गायें पड़ी थीं। उन्हें जंगली जानवरों ने नोच-नोचकर खाया हुआ था। वहीं गोशाला में गायों के लिए खाने व पीने की भी उचित व्यवस्था नहीं दिखाई दी। गायों के चारे व पानी के लिए केवल तीन-चार स्थानों पर ही व्यवस्था की गई थी। इस कारण उन स्थानों गायों व सांडों का जमघट लगा हुआ था। जबकि छोटे बछड़ों के लिए कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दी। हालांकि छोटे बछड़ों के लिए चारे व पानी के छोटे पात्र रखवाए गए थे, लेकिन उन न तो पानी था व न ही चारा। इसके अलावा कुछ गाये व सांड़ बीमार पड़े थे। जिनके उपचार के लिए वहां पर कोई पशु चिकित्सक मौजूद था और न ही बीमार पशुओं को कोई ड्रीप आदि लगाई गई थी। इस प्रकार गोशाला में अनेक कमियां दिखाई दी।
बीमार पशुओं के लिए नहीं है पर्याप्त दवाइयां
गोशाला में पिछले कुछ समय से पशु चिकित्सक के रूप में कार्य कर रहे निजी चिकित्सकों ने बताया कि गोशाला में बीमार पशुओं के लिए पर्याप्त दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। बीमार पशुओं के लिए केवल एंटीबॉयटिक दवाइयां ही उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जबकि बीमार व कमजोर पशुओं को मल्टी विटामिन, ड्रिप आदि आवश्यकता होती है। हालांकि नगर परिषद ने अब इन निजी चिकित्सकों को हटा दिया है।
चारदीवारी का निर्माण नहीं होने से गोशाला में आ रहे जंगली जानवर
उक्त गोशाला काफी बड़ी होने के कारण अभी तक इसकी चारदीवारी का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। गोशाला के कुछ हिस्सों में अभी भी तार बाड़ लगी हुई है। ऐसे में रात के समय जंगली जानवर आसानी से गोशाला में प्रवेश कर जाते हैं और मृत पशुओं को नोच जाते हैं। ऐसे में नगर परिषद को सबसे पहले गोशाला की चारदीवारी का निर्माण करवाना अति आवश्यक है। हालांकि नगर परिषद द्वारा चारदीवारी का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
गोशाला में खेल व खोर की है कमी
गोशाला में गायों के खाने व पीने के लिए बनाई गई खेल व खोल की संख्या मात्र तीन-चार है, जोकि पशुओं की संख्या को देखते हुए काफी कम है। इस कारण खाने व पीने के लिए खेल व खोर में गायों व सांड़ों को जमघट लगा रहता है। इस कारण कमजोर व छोटे बछड़े वहां तक नहीं पहुंच पाते है। जबकि गोशाला में छोटे बछड़ों के खाने व पीने लिए छोटे पात्र रखवाए हैं, लेकिन उनमें न ही पानी रहता और न खाने के लिए चारा।
पांच लोगों पर सैकड़ों पशु की जिम्मेवारी
वर्तमान में गोशाला के करीब 400 पशुओं की देखरेख की जिम्मेवारी केवल पांच ही लोग के जिम्मे पर है। इन्हीं में दो लोगों की रात के समय ड्यूटी लगाई है। ऐसे में देखा जाए तो इन सैकड़ों पशुओं की देखरेख के लिए लोगों की संख्या काफी कम है।
गोशाला में लगातार हो रहे कार्य
नगर परिषद ईओ अभय सिंह ने बताया कि गोशाला में लगातार कार्य करवाए जा रहा हैं। उनके आने के बाद से गोशाला में पानी व बिजली का कनेक्शन और दो अन्य टीन शेड का निर्माण करवाया गया है। इसके साथ ही गोशाला की चारदीवारी का निर्माण कार्य युद्धस्तर करवाया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों के रहने के लिए एक कमरे का भी निर्माण करवाया गया है।
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गोशाला में उन गायों की मौत हुई है जो कमजोर व पॉलिथीन खाई हुई थी। मृत गायों को कर्मचारी निर्धारित स्थान पर दफनाया जाता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण रात के समय अकसर जंगली जानवर यहां आ जाते हैं। इनकी रोकथाम के लिए गोशाला की चारदीवारी का निर्माण करवाया जा रहा है।
-अभय सिंह, ईओ नगर परिषद नारनौल।