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ओडीएफ : ग्रामीण निकले आगे, शहरी क्षेत्र में जा रहे खुले में

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वस्थ भारत अभियान के तहत प्रदेश को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया है। जिले में भी ग्रामीण क्षेत्र को ओडीएफ फ्री घोषित कर दिया गया है। इस मामले मेें पढ़ा-लिखा माने जाने वाला शहरी क्षेत्र अभी तक पिछड़ा हुआ है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि शहरी क्षेत्र को भी जल्द ही ओडीएफ फ्री कर दिया जाएगा। इसके विपरीत हकीकत यह है कि आज भी लोग शहर में खुले में शौच कर रहे हैं। ग्रामीण इलाके में भी ऐसा ही हाल हैं। सरकार की ओर से बनाए जाए रहे शौचालय अभी नहीं बन पाए हैं। नगर पालिका ने 337 आवेदकों को शौचालय की पहली किश्त जारी की है। इनमें से अभी तक एक भी शौचालय नहीं बना है। योजना के तहत इससे ज्यादा शौचालय बनने बाकी हैं। लगभग 1100 लोगों ने शौचालय बनाने के लिए आवेदन किए हैं। इनमें से कई लोगों को तो अभी तक पहली किश्त ही नहीं मिली है। शौचालय के लिए पहली किश्त सात हजार रुपये की दी जाती है। यह पैसा खर्च होने के बाद सात हजार की ही दूसरी किश्त आवेदक को दी जाती है। पालिका प्रशासन का मानना है कि 337 लोग ही शौचालय के योग्य पाए गए हैं। इन्हें किश्त जारी कर दी गई है। यदि अन्य लोग योग्य मिलेंगे तो उनको भी किश्त जारी कर दी जाएगी। पब्लिक न्यूसेंस अधिनियम के तहत कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति खुले में शौच करता पाया जाएगा तो उससे 250 रुपये जुर्माना वसूल किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति दोबारा पकड़ा जाता है तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। ऐसे लोगों के विरुद्ध पब्लिक न्यूसेंस अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।
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शहर में बनाए जाएंगे 2 मोबाइल, 7 साधारण टॉयलेट
नगरपालिका शहर में 2 मोबाइल टायलेट और सात साधारण शौचालय बनाएगी। मोबाइल टॉयलेट पांच लाख रुपये से बनाए जाएंगे। इसके टेंडर किए जा चुके हैं। इसके अलावा बस स्टैंड, अंबेडकर चौक, गउशाला रोड, सेनीपुरा, 11 हट्टा बाजार, रेलवे रोड, मोहल्ला खटीकान और वाल्मीकि मोहल्ले के बीच, साधारण टॉयलेट बनाए जाएंगे। इन टायलेट की देखभाल का जिम्मा नगरपालिका स्कूल, इंस्टीट्यूट, बैंक, कोचिंग सेंटर आदि को सौंपेगी। स्वाभाविक है कि वह लोगों से शौच जाने के लिए पैसे लेगा। उसके साथ पालिका कम से कम एक साल तक का टाइ अप करेगा।

सरकार फंड से शौचालय बनाना आसान काम नहीं
सरकार फंड से शौचालय बनाना आसान काम नहीं है। इसके लिए पहले नपा को आवेदन करना होता है। नपा का कर्मचारी घर में जाकर देखता है कि कोई शौचालय है या नहीं। घर में जगह है कि नहीं। उसकी रिपोर्ट कर्मचारी निगम में देता है। इसके बाद शौचालय बनाने के लिए पहली किश्त जारी की जाती है। दूसरी किश्त जारी करते समय व्यक्ति की फोटो टायलेट के पास खींची जाती है ताकि पता चल सके कि कितना काम हुआ है। लेकिन, निगम के पास इतना स्टाफ नहीं है कि वह 15 दिन में शौचालय का निर्माण करा सके।

अभी भी खुले में शौच जाते हैं, गांव में फैली गंदगी
जिले के गांव में अभी तक जिला प्रशासन खुले में शौच मुक्त नहीं कर सका है। यही कारण है कि गांव में जब लोग शौच करने जाते हैं। वहां पर दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल हो जाता है। यही नहीं, गांव में गंदगी के ढेर लगे हैं। इससे ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है।
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शहर में जल्द ही मोबाइल शौचालय और साधारण शौचालय बनाए जाएंगे। मोबाइल शौचालय के टेंडर जारी हो चुके हैं और एक शौचालय का निर्माण चल रहा है। 337 शौचालयों के लिए हमने पहली किश्त जारी कर दी। अगर और आवेदन आ जाएंगे तो उनको भी हम किश्त जारी कर देंगे।
-रीना बंटी, चेयरपर्सन नगरपालिका

डीसी रूरल एरिया आडीएफ फ्री घोषित किया जा चुका है, जबकि अर्बन अभी तक नहीं किया गया है। अर्बन एरिया को जल्द ओडीएफ फ्री कर दिया जाएगा।
राजनारायण कौशिक, डीसी महेंद्रगढ़
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