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स्कूल मुखिया एक दूसरे की जानेंगे खूबी और कमी

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स्कूल मुखिया एक दूसरे की जानेंगे खूबी और कमी
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स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों में अब नहीं जाएंगे शिक्षा अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिला महेंद्रगढ़ के सरकारी स्कूलों की कमियां और खूबियां अब उस आस-पड़ोस के स्कूल मुखिया ही जानेंगे। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी मकेश लावणियां ने सभी स्कूल मुखियाओं को स्कूल स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में डीईओ, बीईओ, डीईईओ, बीईईओ आदि अधिकारियों को मुख्य अतिथि के रूप में न बुलाकर अपने आस-पड़ोस के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल को बुलाने के आदेश दिए हैं।
अब शिक्षा विभाग से संबंधित कोई भी अधिकारी जिले के सभी स्कूलों में जाकर उनकी कमियां या खूबियों को नहीं जान पाता है। क्योंकि, अधिकारी हमेशा ही किसी न किसी सरकारी कार्य में व्यस्त रहते हैं। वे कभी-कभार ही किसी सरकारी स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचते हैं। इस कारण उस अधिकारी को न तो उस स्कूल की कमियाें का पता चल पाता है और न ही खूबियों की जानकारी होती है। इसलिए जिला शिक्षा विभाग ने एक कार्यक्रम निर्धारित कर सभी सरकारी स्कूलों के मुखियाओं को स्कूल स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में शिक्षा विभाग से जुड़े या अन्य किसी अधिकारी को न बुलाकर उसके आस-पड़ोस के स्कूल मुखिया को बुलाने के लिए कहा है।
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मुख्य अतिथि ही नोट करेगा खूबियां और कमियां
इस योजना के तहत मुख्य अतिथि ही स्कूल समय तक स्कूल में रहकर उस स्कूल की कमियां और खूबियों को क्रम वार नोट करेगा। इस दौरान मुखिया को उस स्कूल में कोई भी कमी दिखाई देती है तो वह उस कमी को उस स्कूल के प्रिंसिपल को बताएगा। स्कूल में कुछ खूबियां दिखाई देती हैं तो वह उन खूबियों को अपने स्कूल में लागू करने का प्रयास करेगा।
स्कूलों को हर माह करने होंगे दो कार्यक्रम
योजना के तहत प्रत्येक सरकारी स्कूल में हर माह कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित करने होंगे। इसमें उन्हें अपने पड़ोसी स्कूल के मुखिया को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना होगा।
स्कूल मुखियाओं का इन पर रहेगा फोकस
मुख्य अतिथि के रूप में स्कूल पहुंचने वाले स्कूल मुखिया को उस स्कूल में सफाई व्यवस्था, साइंस लैब और कंप्यूटर लैब की स्थिति, पीने के पानी की व्यवस्था, शौचालयों की सफाई, बच्चों को दी जा रही शिक्षा का स्तर आदि को ध्यान में रखना होगा।
इस व्यवस्था से स्कूलों में होगा सुधार
इस व्यवस्था में प्रत्येक सरकारी स्कूल में कुछ न कुछ सुधार संभव है। देखने में आ रहा है कि निजी स्कूल एक दूसरे की देखा-देखी अपने संस्थानों में सुधार कर रहे है। इसी प्रकार यदि एक सरकारी स्कूल में दूसरे सरकारी स्कूल के मुखिया को कुछ खूबियां दिखाई देंगी तो वह उसने अपने स्कूल में लागू करने का प्रयास करेगा।
जिले के सरकारी स्कूलों में भेजी राशि
जिले के सभी सरकारी स्कूलों में बकाया बिजली बिल भरने, शौचालय और स्कूल की मरम्मत करवाने आदि के लिए 15 हजार रुपये की राशि भेजी गई है। यह राशि सभी स्कूलों के खातों में आरटीजीएस करवा दी गई है।
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प्रदेश में पहली बार इस प्रकार का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इससे न केवल सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा के स्तर में भी सुधार आएगा।
-मुकेश लावणिया जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।
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