आत्मा का मोल है शरीर का नहीं : धर्ममुनि
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। मानक चौक स्थित स्थानक भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में शुक्रवार को धर्ममुनि महाराज ने कहा कि वासनाओं का त्याग करके मनुष्य आत्मा का कल्याण कर सकता है। वहीं संसार का मोह त्यागने से व्यक्ति आत्म के कल्याण के बारे में सोच सकता है।
मुनिराज ने कहा कि जब तक संसार रूपी राग, द्वेष में लगे रहेंगे तब तक पाप का भागी बनते रहेंगे। इसलिए अब समय आ गया है कि हम पाप रूपी भंवर को छोड़कर धर्म की शरण ले। जैन संत ने कहा कि ये सांसारिक रिश्ते नाते मात्र दिखावे के हैं, मौत के बाद कोई 2 मिनट तक इस शरीर को घर में नहीं रखता है। आत्मा का मोल है शरीर का नहीं हैं। मुनि ने उपस्थित श्रावकों से आह्वान किया कि वे इस चातुर्मास रूपी यज्ञ में अपनी आहुति देकर जीवन को सफल बनाए।