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स्कूल भवन जर्जर, कक्षाएं लगती हैं बाहर

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स्कूल भवन जर्जर, कक्षाएं लगती हैं बाहर
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महेंद्रगढ़ (बुचौली)। भले ही प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को अच्छी सुविधा देने का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम गांव बुचावास के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की पड़ताल की तो वहां नजारा कुछ इस प्रकार देखने को मिला। विद्यालय की पांच कक्षाएं कमरे से बाहर जमीन पर बैठी हुई मिली। इसके अलावा छात्राओं के शौचालय की एक दीवार टूटी हुई थी जबकि तीन कमरे खंडहर हालत में थे। इस दौरान विद्यार्थियों ने बताया कि बारिश के समय पूरी बिल्डिंग टपकती है।

तीन कमरे हुए खंडहर
गांव के सरपंच अजीत सिंह ने बताया कि कई वर्षों पहले स्कूल का भवन बनाया गया था। उस समय स्कूल में 14 कमरे बनाए गए थे। अब स्कूल भवन की हालत जर्जर हो चुकी है। बारिश के मौसम पूरा भवन टपकता है। इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित होती है। उन्होंने बताया कि मार्च 2017 में पीडब्ल्यूडी विभाग की टीम ने भवन का निरीक्षण किया था। इस दौरान टीम ने तीन कमरों को खंडहर घोषित कर दिया था। हालात यह है कि स्कूल में 16 कक्षाएं लगती हैं। जिनमें पांच कक्षाएं बाहर लगती हैं।
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रिपेयर के लिए आया बजट, नहीं मिली खर्च की अनुमति
स्कूल के प्राचार्य बिश्नदयाल ने बताया कि 2013 में स्कूल के खाते में 20 लाख रुपये की ग्रांट रिपयेरिंग के लिए आई थी। इसको खर्च करने के लिए एडीसी के नेेतृत्व में एक कमेटी बनाई जानी थी। न तो ग्रांट के लिए कमेटी बनी और न ही ग्रांट खर्च करने की अनुमति। एडीसी से ग्रांट खर्च करने अनुमति नहीं मिलने के कारण वह राशि आज तक खर्च नहीं हो पाई है।

बारिश आती है तो स्कूल का पूरा भवन टपकने लगता है। एक बार पेड़ भी गिर गया था और दीवार भी ढह गई थी। स्कूल भवन के गिरने का हमेशा खतरा बना रहता है। -प्रियंका कक्षा, 12वीं
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स्कूल में सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। स्कूल के अधिकतर पंखे टूटे हुए हैं। जनरेटर कई दिनों से खराब है जिसे ठीक नहीं करवाया जा रहा है। उमस भरी गर्मी में पढ़ने में काफी दिक्कत होती है। अनिता, कक्षा 11वीं
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स्कूल में कमरे नहीं होने के कारण हमें बाहर बैठना पड़ता है। बारिश आने पर तो दिक्कत बढ़ जाती है। बारिश से बचने के लिए भी यहां छत नहीं होती। इस दौरान पढ़ाई भी प्रभावित होती है। - सरोज
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इस समय विद्यार्थियों को स्कूल में काफी असुविधा हो रही है। न तो कॉमर्स का स्टाफ है न भवन ठीक है। कमरों के अभाव हमें बाहर बैठकर पढ़ना पड़ता है। बारिश आने पर पढ़ाई बंद हो जाती है। साहिल, छात्र
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मैं एक महीने पहले ही आया हूं। दो दिन पहले ही हमने स्कूल का खाता चेक किया है उसमें 20 लाख रुपये आया हुआ है। यह बजट काफी पहले आया है। बजट से जल्द ही स्कूल की रिपेयरिंग करवा दी जाएगी।
- बिश्नदयाल प्राचार्य, राकवमा विद्यालय
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