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गोपाल गौशाला की बैठक में हंगामा, प्रधान समेत पूरी कार्यकारिणी ने दिया इस्तीफा

Sat, 06 Feb 2016 01:17 AM IST
नारनौल ब्यूरो ।
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नारनौल। गोपाल गौशाला में कई गायों की मौत के बाद पहली बार कार्यकारिणी और आम सभा की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक में गौशाला के प्रधान राजकुमार भोजावासिया ने जिला प्रशासन की मौजूदगी में अपना इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा गौशाला की पूरी कार्यकारिणी ने भी इस्तीफा देने की घोषणा की। इस बारे में लिखित रूप से तहसीलदार को सौंप दिया गया है। करीब एक घंटे चली बैठक में गौभक्त और गौशाला कार्यकारिणी के सदस्य प्रशासन की मौजूदगी में एक दूसरे पर जमकर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे। इस दौरान अस्थायी कमेटी के मामले में भी कोई सहमति नहीं बनने के कारण तहसीलदार बैठक से उठकर चले गए। उधर प्रशासन का कहना है कि दोबारा चुनाव होने तक प्रशासन ही गौशाला की देखभाल करेगा। जनवरी माह में 18 से ज्यादा गायों की मौत के बाद कार्यकारिणी की यह पहली बैठक थी। इस बारे में पशु पालन विभाग की पंचकूला से भी टीम जांच के लिए पहुंची थी।  शुक्रवार सुबह 11 बजे आयोजित बैठक एक घंटे देरी से शुरू हुई। बैठक में गौशाला प्रबंधन समर्थित शहर के कई लोगों ने प्रधान का बचाव भी किया। बैठक शुरू होते ही नए सदस्य बनाए जाने की बात पर हंगामा हो गया। जिला पार्षद विनोद यादव भील ने सबसे पहले बैठक के मुख्य एजेंडे पर चर्चा करने को कहा। इसका वहां मौजूद लोगों ने समर्थन किया। गौ-भक्तों के आक्रोश को देखकर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन किशन चौधरी ने प्रधान के इस्तीफे के बाद बैठक की कार्रवाई शुरू करने की बात कही। हंगामा बढ़ता देख गौशाला प्रधान ने लिखित रूप से अपना इस्तीफा सबके सामने पढ़कर कहा कि वे सात वर्ष से गौशाला के प्रधान रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के चलते वे कार्य करने असमर्थ हैं। इस कारण वे अपने पद से इस्तीफा देते हैं। इसके बाद गौशाला का 1 अप्रैल 2015 से 31 जनवरी 2016 तक आय व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। 
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बिना पद गौ-सेवा नहीं करेंगेगौशाला प्रधान और कार्यकारिणी द्वारा इस्तीफा देने के बाद सवाल खड़ा हुआ कि गौशाला में गायों की देखरेख कौन करेगा। इस पर लोगों ने गौशाला प्रबंधन को ही दोबारा चुनाव होने तक गौशाला में गायों की देखभाल करने की बात कही, लेकिन गौशाला प्रबंधन ने सीधे तौर पर कहा वे तो इस्तीफा दे चुके हैं और बिना पद कोई कार्य नहीं करेंगे। गौशाला प्रबंधन द्वारा इस्तीफा देने के बाद गौशाला की देखरेख के लिए गौ-भक्तों ने अस्थाई कमेटी को जिम्मेवारी सौंपनी चाही तो सब्जी मंडी के प्रधान अजीत सैनी ने कहा कि जब गौशाला प्रबंधन ही इस्तीफा दे चुका है तो अस्थाई कमेटी का कोई औचित्य ही नहीं है। गौशाला में केवल प्रबंधन कमेटी ही कार्य करेंगी। हंगामे के चलते तहसीलदार बीच में छोड़ी बैठकगौशाला प्रबंधन के इस्तीफे के बाद गौशाला की देखरेख के लिए जिला प्रशासन की तरफ से पहुंचे तहसीलदार ईश्वर सिंह और सोसाइटी कार्यालय के रजिस्ट्रार राकेश यादव ने गौशाला के दोबारा चुनाव होने तक अस्थाई कमेटी घोषित कर उसे कार्य सौंप दिया जाए। इसके लिए जैसे ही नामों पर चर्चा हुई, प्रबंधन समर्थित लोगों ने हंगामा कर दिया और कहा कि जब तक गौशाला के दोबारा चुनाव नहीं होते तब तक वर्तमान कमेटी को ही गौशाला की देखरेख का कार्य सौंपा जाए। इसके लेकर गौ-भक्तों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने इसका विरोध किया। इससे दोनों पक्ष तहसीलदार के सामने ही एक दूसरे से भिड़ गए। तहसीलदार ने स्वयं खड़े होकर लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन तहसीलदार की किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद तहसीलदार ने वहां से जाना ही मुनासिब समझा।  इस्तीफा देने के बाद तहसीलदार से मिलने पहुंचे प्रधान और गौ-भक्त बैठक से तहसीलदार के जाने के कुछ देर बाद गौशाला के निवर्तमान प्रधान रामकुमार भोजावासिया सब्जी मंडी के प्रधान अजीत सिंह यादव के साथ तहसीलदार से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। तहसीलदार ने उन्हें किसी प्रकार की बातचीत करने के लिए उपायुक्त या एसडीएम से मिलने की बात कही। जैसे ही निवर्तमान प्रधान और सब्जी मंडी के प्रधान तहसीलदार के आवास से निकले। इसी दौरान अस्थाई कमेटी के सदस्य भी कुछ गौ-भक्तों के साथ तहसीलदार के पास पहुंच गए। उन्होंने तहसीलदार ईश्वर सिंह ने गौशाला में गायों की देखभाल के लिए उनको कार्यभार देने की बात कही, लेकिन तहसीलदार ने कहा कि वे उनको कोई भी कार्य भार नहीं सौंप सकते है। इस मामले में वे उपायुक्त या एसडीएम से ही बात करें। 
अनाथ गौशाला के प्रधान ने ली गायों की देखभाल की जिम्मेवारीगौशाला प्रबंधन द्वारा इस्तीफा देने के बाद अस्थाई कमेटी के सदस्यों ने गौशाला प्रबंधन के दोबारा चुनाव नहीं होने तक अपने स्तर पर गायों की देखभाल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस अस्थाई कमेटी के सदस्य आकाश कुमार वर्तमान में अनाथ गौशाला के प्रधान के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने गायों की देखभाल के साथ गौशाला में गायों की देखभाल के लिए लगी लेबर का खर्चा भी अपने स्तर पर देने की बात कही। अस्थाई कमेटी के सदस्यों ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में करीब 1200 के करीब गायें हैं, वहीं निवर्तमान प्रधान ने पंचकूला से आई पशुपालन विभाग की टीम को 2600 गायें होने की सूचना दी थी। 
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यह है पूरा मामलागौशाला में जनवरी माह में पड़ी जबरदस्त ठंड के कारण लगातार कई गायों की मौत हो गई थी। 18 जनवरी को गौशाला में इतनी गायों की एकसाथ मौत की खबर जैसे ही गोभक्तों को लगी तो उन्होंने हंगामा कर दिया। इसके बाद भी तीन-चार दिनों तक गायों की मौत का सिलसिला जारी रहा। गोभक्तों ने इससे नाराज होकर गौशाला के प्रधान से इस्तीफे की मांग की। इसके बाद प्रधान ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था। इस मामले को लेकर लोग एसडीएम और डीसी से भी मिले। पशु पालन विभाग और गोरक्षा दल हरियाणा की टीम ने भी गोशाला का दौरा किया। चौतरफा दबाव से घिरे प्रधान ने पांच फरवरी को कार्यकारिणी और आम सभा की बैठक बुलाने का निर्णय लिया।
कोट हंगामा होने के कारण बैठक की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। गौशाला के पूरे प्रबंधन ने अपना इस्तीफा दे दिया है। जब तक गौशाला के दोबारा चुनाव नहीं होते तब तक जिला प्रशासन ही गौशाला में गायों की देखभाल करेगा। गौशाला के बैठक की कार्रवाई की सूचना उन्होंने उपायुक्त अतुल कुमार और एसडीएम विवेक कालिया को दे दी है। उनके आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू हो पाएगी। -ईश्वर सिंह, तहसीलदार, नारनौल
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