-कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी ने काम की जांच की, काम हो जाने के बाद सरपट दौड़ेंगी ट्रेनें
फोटो नंबर तीन
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। रेवाड़ी-फुलेरा रेल मार्ग पर बिछाई जा रही इलेक्ट्रिक रेल लाइन के पूरा होने में अभी समय लगेगा। इस रेलमार्ग पर मार्च 2016 तक काम पूरा हो जाना चाहिए था, मगर निर्धारित समय से एक वर्ष पूरा हो जाने के बाद यह 214 किलोमीटर में से केवल 85 किलोमीटर तक ही पूरा हो पाया है। तीन दिन पूर्व 05 अक्टूबर को कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी ने इस 85 किलोमीटर मार्ग का दौरा कर इस काम की जांच की।
दिल्ली से अहमदाबाद तक की रेलवे लाइन का विद्युतीकरण होना है। इसके तहत रेवाड़ी तक पहले ही विद्युतीकरण लाइन का किया हुआ है। अगस्त 2015 में रेवाड़ी से फुलेरा तक के पहले चरण का कार्य रेलवे द्वारा शुरू किया गया था, जो मार्च 2016 में पूरा होना था, मगर यह कार्य बड़ी ही धीमी गति से चल रहा है। दो साल के समय में यह काम केवल 85 किलोमीटर तक चलकर जिलो तक ही पहुंचा है। जिले से आगे फुलेरा की दूरी करीब 129 किलोमीटर तक रह जाती है। ऐसे में इस काम को 129 किलोमीटर तक तय करने में दो साल ओर लग जाएंगे तथा लोगों को अभी इस मार्ग पर फास्ट ट्रेन में बैठने के लिए इंतजार करना होगा।
214 किलोमीटर में 29 स्टेशन
रेवाड़ी से फुलेरा की दूरी 214 किलोमीटर है। इसके बीच 29 रेलवे स्टेशन आते हैं। कार्य का निरीक्षण करने के लिए जयपुर मंडल के डिवीजन इंजीनियर एके सक्सेना भी यहां का दौरा कर चुके हैं। वहीं पांच अक्टूबर को कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी ने भी इस मार्ग का दौरा कर काम का जायजा लिया।
निमकाथाना के आसपास खोदे जा रहे गड्ढे
फिलहाल ओवर हेड इक्यूपमेंट यानी पिलर लगाने के लिए निमकाथाना के आसपास लाइन के किनारों पर गड्ढे खोदे जा रहे हैं। इन गड्ढों में आरसीसी बेस तैयार करके पिल्लर खड़े किए जाएंगे। इस पर एलिवेटेड लीवर के 11 मीटर ऊंचे खंभे लगाए जाएंगे। यह पूरा हो जाने के बाद तो काम तेजी से कंप्लीट होगा।
घटेगा खर्चा, कम होगा प्रदूषण, बढ़ेगी स्पीड
नारनौल के स्टेशन अधीक्षक महेंद्र कुमार का कहना है कि लाइन के विद्युतीकरण होने का सबसे अधिक लाभ यह होगा कि वायु व ध्वनि प्रदूषण नहीं होगा। इसके लिए विश्व भर में जोर-शोर से अभियान चलाया जा रहा है। डीजल का खर्च भी बंद हो जाएगा। जो बिजली की तुलना में कई गुणा अधिक होता है। विद्युतीकरण होने पर मार्च पर ट्रेनों की स्पीड 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। वर्तमान समय में ट्रेनों की स्पीड 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा है।
काठूवास में बनेगा 132 केवी सब स्टेशन
लाइन के विद्युतीकरण के साथ-साथ काठूवास रेलवे स्टेशन के समीप 132 केवीए सब स्टेशन भी बनाया जाएगा। यह पावर स्टेशन 60 बाई 100 वर्ग मीटर में लगाया जाएगा। इससे रेल लाइन को बिजली आपूर्ति की जाएगी। यही नहीं काठूवास में राजस्थान सरकार की ओर से कंटेनर डिपो भी बनाया गया है। इसका लाभ भी मिलेगा।
हर रोज गुजरती है करीब 80 मालगाड़ियां
रेवाड़ी-फुलेरा रेलवे ट्रैक पर हर रोज औसतन 80 मालगाड़ियां गुजरती हैं। इनके अलावा 3 पैसेंजर ट्रेन अप-डाउन, चेतक एक्सप्रेस डेली, बांद्रा-चंडीगढ़ सप्ताह में दो दिन, बांद्रा-दिल्ली एक्सप्रेस सप्ताह में एक दिन, अजमेर से हजरत निजामुद्दीन जन शताब्दी एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन चलती है। इसके अलावा एक डीईएमयू ट्रेन भी दिल्ली से निमकाथाना के लिए चलती है।
2019 में पूरा होगा रेल फ्रेट कॉरिडोर
गुजरात से दिल्ली तक बनने वाले रेलवे फ्रेट कॉरिडोर का कार्य भी तेजी से चल रहा है। इसके चलते रेवाड़ी से फुलेरा के बीच अर्थ वर्क का कार्य करीब-करीब पूरा हो गया है। मेन कार्य अर्थ वर्क ही होता है। इसके बाद तो कार्य तेजी से चलता है। वर्ष 2014 में आरंभ हुए इस कार्य को वर्ष 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य है। तेज गति से काम चल रहा है। उससे लगता है कि काम निर्धारित समय में पूरा हो जाएगा।
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रेवाड़ी-फुलेरा रेल लाइन का विद्युतीकरण किया जा रहा है। करीब 85 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर काम पूरा हो गया है। इसका निरीक्षण भी किया जा चुका है। अब आगे पोल लगाने का कार्य किया जा रहा है।
-महेंद्र सिंह, स्टेशन अधीक्षक, नारनौल