मलेरिया, डेंगू से लड़ने के लिए नहीं संसाधन, कैसे तोड़ेंगे ‘डंक’
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। बरसात के बाद अब जिले के अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। अस्पतालों में वायरल बुखार के मरीज आने लग गए हैं। नागरिक अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल तक में मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या एक हजार के पार कर चुकी है। ऐसे में लोगों को अब मलेरिया और डेंगू का डर सता रहा है। हालांकि, अभी तक आठ मरीज ही मलेरिया पाजिटिव के आए हैं। लेकिन इनकी संख्या बढ़ने की आशंका है। अगस्त के बाद सितंबर और अक्टूबर में डेंगू के मरीज ज्यादा आते हैं। जिला प्रशासन डेंगू और मलेरिया के प्रति गंभीर नहीं है। यही कारण है कि जिले में फॉगिंग के लिए प्रयुक्त की जाने वाली मशीनें खराब हैं। नारनौल शहर के लिए एक फॉगिंग मशीन है, वह भी खराब है।
इस बार भी जिला में मलेरिया और डेंगू फैलने की आशंका जताई जा रही हैं। बारिश होने के कारण वायरल पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब अगस्त के अंत से अक्टूबर माह तक डेंगू और मलेरिया फैलने की संभावनाएं होती हैं। इसके बाद भी प्रशासन इसके लिए तैयार नजर नहीं आ रहा।
दो बड़े शहर, पांच कस्बे, 346 गांव और केवल मशीन 10
जिले में दो बड़े शहर नारनौल और महेंद्रगढ़ हैं। इसके अलावा पांच बड़े कस्बे अटेली, कनीना, नांगल चौधरी, निजामपुर और सतनाली सहित 346 गांव हैं। इनकी आबादी करीब 9 लाख 46 हजार है। इसके लिए केवल दस फॉगिंग मशीनें ही स्वास्थ्य विभाग के पास थी। उनको एक साल पूर्व नगर परिषद और पालिकाओं को सौंप दिया है।
एक साल से स्वास्थ्य नहीं, नप कर्मचारी करते हैं फॉगिंग
गत वर्ष तक मच्छरों को मारने के लिए स्वास्थ्य विभाग शहर में फॉगिंग करता था। अब ऐसा नहीं है। शहर में फॉगिंग अब नगर परिषद या नगर पालिका अपने कर्मचारियों से करवा रही है। एक साल पूर्व स्वास्थ्य विभाग के पास अपनी 10 में से दो फॉगिंग मशीन खराब है। सही आठ मशीन को नगर पालिका और नगर परिषद में गत वर्ष भिजवा दिया था। इसमें दो महेंद्रगढ़ नगर पालिका, दो अटेली नगर पालिका, दो कनीना नगर पालिका और दो नारनौल नगर परिषद में दी गई हैं। नारनौल नप में पिछले वर्ष एक मशीन खराब हो गई, जबकि दूसरी मशीन इस बार एक दो जगह फॉगिंग कराने के बाद खराब हो गई।
कई मशीनें खराब, कैसे होगी रोकथाम
नगर परिषद और नगर पालिकाओं को भेजी गई कई फॉगिंग मशीनें खराब हैं। नारनौल नगर परिषद में रखी गई मशीन भी खराब है। ऐसे में यहां पर फॉगिंग कैसे होगी। अन्य पालिकाओं में भेजी गई मशीनें भी खराब हैं।
अस्पताल में अलग से बनाया वार्ड
पिछले वर्ष के मलेरिया और डेंगू के प्रकोप से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष अपने स्तर पर भी प्रयास किया है। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में एक वार्ड स्थापित किया गया है। डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को सीधे नारनौल के नागरिक अस्पताल में लेकर आएं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम इन दिनों जागरूकता अभियान भी चलाए हुए है।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मी कर रहे जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीम निजी कार्यालय और घरों में जाकर जांच कर रही हैं। इस दौरान टीम देख रही है कि किसी के घर या कार्यालय के कूलरों या टंकियों में लार्वा तो नहीं पनप रहा। यदि कहीं लार्वा मिलता है तो आरोपी के विरुद्ध एपीडरमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
ये हैं मलेरिया का आंकड़ा
वर्ष मामले
2011 360
2012 308
2013 153
2014 36
2015 32
2016 24
2017 08 अगस्त तक
ये है डेंगू का आंकड़ा
वर्ष मामले
2014 02
2015 05
2016 03
2017 00 अगस्त तक
कैसे पता लगाएं मलेरिया का
-सर्दी औरा कंपकपी के साथ तेज बुखार।
-उल्टियां और सिर दर्द।
-गर्मी लगना और पसीने के साथ बुखार का उतरना।
-बुखार हर रोज, एक दिन छोड़कर या फिर चौथे दिन आना।
-कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।
ये बरते सावधानी
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
घर के अंदर और बाहर पानी सात दिन से अधिक न खड़ा होने दें। मादा मच्छर ऐसे पानी में अंडे देती है।
सुबह और शाम शरीर को कपड़ों से पूरी तरह ढककर रखें।
पानी के बर्तनों को अच्छी तरह से ढककर रखें।
सप्ताह में एक बार पानी के सभी बर्तनों जैसे कि टंकियां, घड़े, कूलर इत्यादि को खाली कर दें।
घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर जालियां लगावाएं।
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
कीटनाशक दवाई का छिड़काव घर के सभी कमरों में करवाएं।
डेंगू बुखार का लक्षण
-छाती और ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे खराशें।
-सिर से माथे की ओर तेज दर्द।
-उल्टी आना।
-स्वाद का पता न चलना और भूख न लगना।
-मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
-अचानक तेज बुखार।
-आंखों के पीछे दर्द और आंख के हिलने से दर्द में तेजी।
डेंगू और मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत पंफ्लेट और पोस्टर बांटे गए हैं। कोई केस सामने आता है तो उस गांव में दवाइयों का छिड़काव भी किया जाता है। अभी डेंगू का कोई केस नहीं आया है, जबकि मलेरिया के आठ केस आ चुके हैं।
-डा. राजेश कुमार, कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल नारनौल।
नप के पास फॉगिंग की एक ही मशीन है। कुछ दिन पहले शहर के कई हिस्सों में फॉगिंग कराई गई थी, अब मशीन खराब है। इसे दिल्ली ले जाकर जल्द ठीक कराया जाएगा।
-भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल।