फोटो नंबर- 16नई अनाज मंडी में टीन शेड के नीचे रखे सरसों के बैग। संवाद
नारनौल। क्षेत्र में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद मंडियों में अपेक्षित आवक नहीं हो रही है। अब तक करीब 15 प्रतिशत सरसों ही मंडियों में पहुंची है। इससे जमाखोरी की आशंका बढ़ गई है। अनुमान है कि बाजार भाव एमएसपी से अधिक होने के कारण करीब 40 से 50 प्रतिशत किसान पहले ही अपनी सरसों बेच चुके हैं।
मंडियों के आंकड़ों के अनुसार, अब तक नारनौल में करीब 50 हजार और अटेली में 70 हजार क्विंटल सरसों की आवक हुई है। रविवार को नारनौल में 15 और अटेली में 75 गेटपास जारी किए गए जबकि आवक क्रमशः 300 और 2 हजार क्विंटल रही।
नारनौल, अटेली और नांगल चौधरी क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 10 लाख क्विंटल सरसों उत्पादन का अनुमान है लेकिन 17 दिन बीतने के बाद भी मंडियों में केवल करीब 1.20 लाख क्विंटल सरसों ही पहुंची है जबकि इस समय तक 4 से 5 लाख क्विंटल आवक होनी चाहिए थी।
जमाखोरी की आशंका, प्रशासन सख्त
मंडी में कम आवक के पीछे खेतों से सीधे खरीद और किसानों की ओर से बेहतर भाव की प्रतीक्षा प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। वहीं जमाखोरी की आशंका को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता टीम ने कपूरी और भड़ाफ गांव में छापेमारी कर करीब 1 हजार क्विंटल सरसों व गेहूं के अवैध भंडारण का खुलासा किया।
वर्जन :
सरसों बेचने के लिए मंडी आने वाले सभी किसानों को नियमानुसार ही गेटपास जारी किए जा रहे हैं। किसानों से अपील है कि अनिवार्य दस्तावेज साथ लेकर आएं ताकि गेटपास जारी करवाते समय परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
-नुकुल यादव, सचिव, मार्केट कमेटी, नारनौल