दो हजार एकड़ रकबे में फैली क्रेशरों की डस्ट
नांगल चौधरी। क्षेत्र के गांव धोलेड़ा, बिगोपुर, जैनपुर, बायल, बखरीजा, गोलवा के आसपास 45 से अधिक क्रेशर स्थापित हो चुके हैं। जिन पर पत्थर पिसाई के दौरान उड़ती है। कंट्रोल नहीं होने से डस्ट दो हजार से अधिक रकबे में फैल गई है। इससे बार-बार फसल प्रभावित होने लगी है और आर्थिक नुकसान के चलते किसान खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर हैं। वहीं डस्ट के कारण पांच गांवों में दमा, टीबी, एलर्जी, नेत्र से संबंधित मरीजों की संख्या तीन हजार पहुंच चुकी है। इसके बावजूद जिला प्रशासन मूकदर्शक बना है।
बता दें कि नांगल चौधरी क्षेत्र में औद्योगिक संस्थान नहीं है। ग्रामीणों की आजीविका खेतीबाड़ी पर निर्भर है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण गांवों में भूजल समस्या होने लगी है। करीब 15 साल पहले धोलेड़ा के पास क्रेशर संचालन को मंजूरी दी गई थी। जिला प्रशासन ने तर्क दिया कि क्रेशरों पर ग्रामीणों को नजदीकी रोजगार मिल सकेगा। जिससे भूजल के अभाव में प्रभावित फसल की भरपाई हो सकेगी। मंजूरी के दौरान क्रेशर संचालकों को नियमित रूप से पानी छिड़काव, पौधरोपण, प्राथमिक उपचार, मजदूरों की सुरक्षा संबंधित इंतजाम के निर्देश दिए गए थे। हस्ताक्षर युक्त एग्रीमेंट लेने के बाद विभाग ने लाइसेंस उपलब्ध कराए गए थे।
धोलेड़ा के आसपास बढ़ रही क्रेशरों की संख्या
धोलेड़ा, बखरीजा के आसपास क्रेशरों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। जिन पर रोजाना 50 हजार टन से अधिक पत्थरों की पिसाई होती है। लेकिन अधिकांश संचालक निर्धारित मापदंडों की पालना नहीं कर रहे। पत्थर पिसाई के दौरान एक भी क्रेशर पर जल छिड़काव नहीं होता। डस्ट उड़कर धोलेड़ा, बिगोपुर, जैनपुर, बखरीजा, मेघोत बींजा गोलवा गांव तक पहुंचने लगी है। डस्ट की धुंध से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो गया। शरीर में धूल, मिट्टी प्रवेश करने से उनका स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा है। इससे परेशान ग्रामीण जिला प्रशासन को समस्या से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है।
क्षमता से अधिक भार से सड़कें जर्जर
पीडब्लूडी विभाग कते मुताबिक ग्रामीण सड़कें 8-10 टन वजन झेल सकती हैं। 40-50 टन वजन पड़ने से विभिन्न सड़कें गारंटी अवधि खत्म होने से पहले ही जर्जर हो चुकी। टूटी सड़क पर वाहनों की रफ्तार से धूल के गुबार उड़ना शुरू हो गया। आंखों में मिट्टी पडने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बढ़ गई।
चने की फसल पर पाउडर जमा
पिछले दिनों क्रेशर संचालकों ने रोजाना पानी छिड़काव का भरोसा दिया था। जिससे आश्वस्त किसानों ने क्रेेशरों के आसपास लगभग 800 एकड़ पर चने की बिजाई कर दी। संचालक पानी छिड़काव नहीं कर रहे, इससे फसल नष्ट होने के कगार पर है। वहीं 1200 एकड़ से अधिक रकबा बंजर पड़ा है।
पंचायती जमीन लीज पर देने का दबाव
क्रेशर जोन के पास एक पंचायत की जमीन लगती है। जिसे लीज पर लेने के लिए एक सत्तासीन नेता भागदौड़ कर रहा है। सरपंच द्वारा इंकार करने पर उक्त नेता एक कद्दावर मंत्री के पास पहुंच गया। जिसने प्रशासनिक अधिकारियों पर जल्द लीज प्रस्ताव मंजूरी के निर्देश दिए हैं।
राजनीतिक संरक्षण बना समस्या
विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने डस्ट से प्रभावित स्वास्थ्य व खेतीबाड़ी से राजनेता अवगत हैं, किंतु संचालक उनके नजदीकी होने के कारण चुप है। दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। जिस कारण गांवों में रहना भी मुश्किल हो गया। बताया कि दूषित वातावरण के चलते युवा वर्ग भी हार्ट अटैक की चपेट में आने लगे हैं।
निर्धारित मापदंडानुसार क्रेशर संचालन के निर्देश
पत्थर पिसाई के दौरान पानी का छिड़काव जरूरी है, ताकि डस्ट नहीं उड़े। संचालकों को सुरक्षा, प्रदूषण के मापदंड पूरे करने होंगे। धोलेड़ा क्रेशर जोन में अधिक डस्ट उड़ने की शिकायत मिल रही है। जल्द ही मापदंड़ों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मोहित मुदगिल, एसडीओ, प्रदूषण विभाग