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गांव कोथल में मिला मलेरिया पॉजिटिव ककक 19-16-11

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अमर उजाला ब्यूरो
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महेंद्रगढ़। क्षेत्र में मलेरिया ने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। पिछले पांच दिनों में उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में दो केस आ चुके हैं। इन गांवों में और भी संदिग्ध केस होने की संभावना है। बहुउद्देश्यीय कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण क्षेत्र को नहीं संभाला जा रहा है। इतना नहीं स्वास्थ्य विभाग ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। अभी तक कर्मचारियों की हड़ताल अनिश्चितकालीन है। अगर समय रहते इन क्षेत्रों में जाकर स्लाइड नहीं बनाई गई तो ओर भी लोग मलेरिया से पीड़ित हो सकते हैं।
वीरवार को उप नागरिक अस्पताल में सुदेश पुत्र ओमप्रकाश निवासी कोथल कलां बुखार की जांच करवाने पर मलेरिया पॉजिटिव पाया गया। पिछले पांच दिन में मलेरिया का यह दूसरा केस है। जिले में प्रतिदिन 30 से 40 संदिग्ध केस आ रहे हैं। जिले में इस साल सात मलेरिया पॉजिटिव मिले हैं। उक्त मरीज को उप नागरिक अस्पताल से 15 दिन का डाइग्नोस दिया गया है। परंतु अभी तक मरीज के घर पर स्लाइड बनाने के लिए टीम नहीं पहुंची। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या काफी कम है। पिछले वर्ष 25 मलेरिया के मरीज आए थे।
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नहीं बनाई जा रही स्लाइडें
बहुउद्देश्यीय कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्लाइडें नहीं बनाई जा रही। क्षेत्र में अभी तक दो केस आ चुके हैं। परंतु किसी भी मरीज के घर पर टीम पहुंचकर स्लाइड नहीं बनाई। पांच दिन पूर्व गांव मालडा में ओकेश नामक मरीज को मलेरिया हुआ था। वीरवार को गांव कोथल कलां के सुदेश को मलेरिया पॉजिटिव मिला है। परंतु अभी तक किसी के घर लारवा देखने के लिए टीम नहीं पहुंची।

छह वर्ष में सबसे कम आए मलेरिया केस
स्वास्थ्य विभाग की टीम की जागरूकता के चलते इस बार मलेरिया के पिछले छह वर्षों की तुलाना में सबसे कम केस आए हैं। विभाग की टीम निरंतर लोगों को जागरूक किया है। डेंगू के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। 2012 में जिले में 308 मरीज आए थे। उसके बाद 2017 में 25 केस और अगस्त 2018 तक मात्र सात मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं, डेंगू पिछले वर्ष तीन केस आए थे इस बार एक भी केस डेंगू का नहीं आया है।

मलेरिया
वर्ष संख्या
2012 308
2013 153
2014 36
2015 32
2016 24
2017 25

डेंगू
वर्ष संख्या
2014 2
2015 5
2016 3
2017 3
2018 0

550 परिवारों को दिया जा चुका है नोटिस
इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न स्थानों पर जाकर 65214 स्लाइडें बनाई हैं। जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 12650 कम हैं। विभाग की ओर से जिन स्थानों पर लार्वा मिला। उस जगह का पानी खाली करवाए गए और उन परिवारों को नोटिस भी जारी किए है। इस बार लगभग 550 घरों को टीम ने नोटिस जारी किया है। जबकि हजारों की संख्या में टंकी आदि खाली करवाई गई हैं।

इन स्थानों पर पैदा होते हैं मच्छर
डिप्टी सीएमओ डॉ. धर्मेश ने बताया कि डेंगू शहरीकरण का एक अभिशाप है। डेंगू साफ पानी में पैदा होता है और दिन के समय काटता है। उन्होंने बताया कि लोग टंकी आदि में पानी चढ़ाने के लिए टैंकों में पानी स्टोर कर लेते हैं। उसके बाद टंकी की सफाई पर ध्यान नहीं देते। ठंडी हवा के लिए कूलर, एसी और फ्रीज इन स्थानों पर डेंगू पैदा होते हैं। मच्छर अंडे दे जाते हैं। गमले और पक्षियों का पानी रखने का बर्तन में भी मच्छर अंडे दे देते हैं।
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वर्जन
जिले में अब तक सात मरीज मलेरिया के आ चुके हैं। सभी को 15 दिन का डाइग्नोस दिया गया है। डेंगू का अभी तक कोई केस नहीं आया है। इस बार लोग स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक हुए हैं। हमारी टीमों ने भी लोगों को जाकर जागरूक किया है। ये उसी का परिणाम है कि मलेरिया और डेंगू के केस कम आए हैं।
- धर्मेश, डिप्टी सीएमओ, नारनौल।
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