फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं पहुंची सभी बच्चों तक नहीं कृमि नाशक ऐलबेंडाजोल की गोली

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

नारनौल।
स्वास्थ्य विभाग हरियाणा का शनिवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस बनाने की योजना जिला में पूर्ण रूप से सिरे नहीं चढ़ पाई। छह साल से 19 साल तक के बच्चों को गोलियां खिलाने की इस योजना के लिए दो लाख 22 हजार बच्चों का टारगेट रखा गया था, मगर शनिवार को करीब एक लाख पांच हजार बच्चों को ही यह दवा खिलाई जा सकी। कृमि नाशक दवा सभी सरकारी, प्राइवेट स्कूलों के अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों पर खिलाई जानी थी, मगर दूसरा शनिवार होने के कारण शहर के कई प्राइवेट स्कूल बंद रहे। वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में यह दवा नहीं पहुंची। इसके अलावा गैर मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों व प्ले स्कूलों में भी दवा नहीं पहुंच पाई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शनिवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। इसके तहत बच्चों को पेट में कीड़े मारने की दवा एलबेंडाजोल खिलाई गई। मिशन के तहत शनिवार को यह दवाई दो लाख 22 हजार बच्चों को पिलाने का टारगेट रखा गया था, मगर शनिवार को अनेक प्राइवेट स्कूल बंद रहे। वहीं प्ले तथा गैर मान्यता प्राप्त अनेक स्कूलों में दवाई नहीं पहुंची। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों से दवाई लेने के निर्देश थे, मगर शहर के किसी भी आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे स्कूलों के लिए गालियां नहीं पहुंची। जिसके कारण हजारों की संख्या में बच्चे यह गोली खाने से वंचित रह गए। हालांकि विभाग द्वारा ऐसे बच्चों को 15 फरवरी को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन


यह है कार्यक्रम
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत छह साल से 19 साल तक के बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा एलबेंडाजोल खिलाई जानी है। इसके तहत बच्चों को चबाने वाली गोलियां दी गई। यह कार्यक्रम सभी निजी व सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क खिलाई जानी थी। वहीं गैर पंजीकृत स्कूलों व स्कूल न जाने वाले बच्चों के लिए यह दवाई आंगनबाड़ी केंद्र से देनी थी।

गोली खाने से जिले में कई बच्चों का जी घबराया
वैसे से स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस गोली से बच्चों को कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, मगर जिला के नारनौल शहर व सतनाली में कई बच्चों को जी घबराने की शिकायत आई। कई बच्चों ने उल्टी भी की। जिसके बाद बच्चों को वहां लेटाया गया तथा उन्हें तुरंत प्राथमिक सहायता दी गई। थोड़ी देर में बच्चे ठीक हो गए।

क्या होता है पेट के कीड़ों से बच्चों को
पेट में कीड़े होने से बच्चों में कुपोषण व खून की कमी होती है। बच्चों में थकावट रहती है। पूरा शारीरिक व मानसिक विकास नहीं होता।

पेट के कीड़ों से बचने के तरीके
- खुले में शौच न जाएं
- आसपास सफाई रखें
- साफ पानी पीयें तथा फल व सब्जियां धो कर खाएं
- पानी को हमेशा ढंक कर रखें
- नाखूनों को काटकर रखें
- जूते चप्पल पहन कर रहें
- खाना खाने से पहले व शौच के बाद अपने हाथों को धोएं

पंचकूला से आए उप निदेशक ने की शुरूआत
इसके तहत पंचकूला से आये स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक डॉ. राकेश सहल व सिविल सर्जन डॉ. इन्द्रजीत धनखड़ ने राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली खिलाकर कृमि नाशक दिवस की शुरूआत की। वहीं इस बारे में उप सिविल सर्जन (प्रतिरक्षण) डा. रामनिवास डहिनवाल ने बताया कि 7 फरवरी से 7 मार्च तक सूक्ष्म पोषक तत्व अनुपूरक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसमें 6 से 60 माह के बच्चों को आयरन पोषक तत्व, विटामिन ए व कृमिनाशक दवा पिलाने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अवसर पर डा. अशोक कुमार उप सिविल सर्जन (टीबी), डा. धर्मेश सैनी उप सिविल सर्जन (एनएचएम), पवन भारद्वाज, प्राचार्य गर्ल स्कूल सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक लोग मौजूद थे।
विज्ञापन


जिले के सभी छह से 19 साल तक के बच्चों को यह गोली खिलाई जाएगी। अगर आज कोई बच्चा छूट गया तो उसको 15 फरवरी को गोली खिलाई जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में पहले ही दवाई पिलाने व गोली खिलाने का कार्यक्रम चल रहा है। - डा. रामनिवास डहिनवाल, उप सिविल सर्जन, प्रतिरक्षण, नारनौल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें