अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
सरकार मातृ-शिशु की सुरक्षा व उनकी मृत्यु दर को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन यह आंकड़ा कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि आज भी महिलाओं का प्रसव घर पर ही करवाया जा रहा है। संसाधनों के अभाव में घर पर करवाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के बाद उसकी व नवजात बच्चे की सही प्रकार देखभाल नहीं हो पाती है। इस कारण हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की जान को खतरा बन जाता है, बल्कि सही प्रकार से देखभाल व समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मातृ-शिशु की मौत हो जाती है।
वर्ष 2016 में शिशु मृत्यु दर का आंकड़ा एक हजार शिशुओं पर 28 था, वहीं 2017 यह बढ़कर 34 पहुंच गया। इसी प्रकार मातृ मृत्यु दर वर्ष 2016 में 85 के मुकाबले 2017 में बढ़कर 112 हो गया है। वहीं जिले में घर पर गर्भवती महिलाओं की करवाई जाने वाली डिलीवरी का आंकड़ा भी पिछले वर्ष 2016 में 3 प्रतिशत (228) के मुकाबले 2017 में 5 प्रतिशत (261) पर पहुंच गया है। इस पर चिंतन के लिए कुछ दिन पूर्व उपायुक्त ने भी सिविल सर्जन के साथ सभी चिकित्सकों व अन्य स्टाफ सदस्यों के मीटिंग कर उन्हें इस पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
गर्भवती महिलाओं की नागरिक अस्पताल में निशुल्क की जाती हैं सभी जांच
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ती मातृ-मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के मकसद से सभी नागरिक अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की सभी प्रकार की जांच के लिए एक दिन निर्धारित किया है जिसमें उनकी खून व अल्ट्रासाउंड अन्य सभी प्रकार की जांच निशुल्क करने का प्रावधान है। यही नहीं अगर उस अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की किसी प्रकार की जांच के लिए संसाधन नहीं है तो अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर निजी अस्पताल से टाइअप कर उस गर्भवती महिला की जांच करवाएगा जोकि निशुल्क होगी।
25 फीसदी गर्भवती हाइरिस्क श्रेणी में शामिल
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 25 फीसदी गर्भवती महिलाएं हाइरिस्क श्रेणी में हैं। वहीं 10 प्रतिशत महिलाएं हाइपर टेंशन से पीड़ित हैं। आठ फीसदी महिलाओं को आयरन की टेबलेट नहीं मिल रही। इससे जच्चा-बच्चा को जानलेवा खतरा बन गया है। इसके लिए विभाग ने मातृ-शिशु की सुरक्षा के लिए सीएचसी स्तर पर मासिक कैंप निर्धारित किए हैं।
प्रसव के बाद हेल्थ वर्कर्स करेगी जच्चा-बच्चा की जांच
सरकार की हिदायत के अनुसार शत-प्रतिशत डिलीवरी नागरिक अस्पताल में होनी चाहिए, लेकिन जागरूकता के अभाव में अभी घर पर ही गर्भवती का प्रसव करवाया जा रहा। जिस कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर निरंतर बढ़ रहा है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रसव के बाद 42 दिनों तक स्वास्थ्य वर्कर्स को जच्चा-बच्चा की घर पर ही विभिन्न जांच करने के निर्देश जारी किए हैं ताकि मृत्यु दर पर कुछ अंकुश लग सके।
वर्ष 2016-17 में ब्लॉक वाइज होम डिलीवरी की रिपोर्ट
ब्लॉक होम डिलीवरी
नारनौल 29
सतनाली 43
अटेली 29
नांगल चौधरी 42
नांगल सिरोही 15
कनीना 35
दौचाना 44
सेहलंग 24
मातृ-मृत्यु दर का आंकड़ा
वर्ष शिशु मृत्यु दर
2015 28
2016 28
2017 34
वर्ष मातृ मृत्यु दर
2015 98
2016 85
2017 112
एंबुलेंस पर निर्भर न रहें परिजन
जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन अधिकारी दिलबाग सिंह ने प्रसव पीड़िता के परिजनों को एंबुलेंस पर ही निर्भर नहीं रहने की हिदायत देते हुए कहा कि इमरजेंसी होने पर वे अन्य किसी निजी वाहन से पीड़िता को लेकर अस्पताल पहुंचे ताकि उसे समय पर सही इलाज मिल सके और किसी प्रकार अनहोनी से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि जिले में कुल सात एंबुलेंस हैं, जबकि नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 55-60 औसतन डिलीवरी होती हैं। ऐसे में सभी को तत्परतापूर्वक एंबुलेंस मिलना संभव नहीं हो पाता है। इसलिए इमरजेंसी होने पर प्रसव पीड़िता को निजी वाहन से अस्पताल लेकर पहुंचे, ताकि सही समय पर उसे सही इलाज मिल सके।
एएनएम पर होगी कार्रवाई
जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन अधिकारी दिलबाग सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने होम डिलवरी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित एएनएम को सख्त निर्देश जारी किए हैं जिसमें अगर उक्त ब्लॉक में प्रसव घर पर होने की शिकायत आती है तो उक्त ब्लॉक की सीएचसी या पीएचसी में तैनात एएनएम पर कार्रवाई की जाएगी।
एएनएम को एएनसी रिपोर्ट करनी होगी अपडेट
विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली होम डिलीवरी बंद करने की योजना तैयार की है। इसमें एएनएम को एएनसी रिपोर्ट पार्टल पर अपडेट करनी होगी। वहीं आशा वर्कर्स की मार्फत गर्भवती महिलाओं का नियमित रूप से टीकाकरण, चेकअप व स्वच्छता जांच करनी होगी। इसके अलावा महिला के पति को चिकित्सक से मिलने के लिए भेजना है, क्योंकि महिला में विभिन्न बीमारियों की पति को पूरी जानकारी होती है। जो डॉक्टर के साथ विचार-विमर्श कर उसका ठीक प्रकार से इलाज करवा सकता है। विभाग के अनुसार पिछले वर्ष 18 प्रसव पीड़िताओं की मौत हुई थी जिनमें 13 को एनिमिया व अन्य बीमारियां से ग्रसित थी। इसलिए चिकित्सक के संपर्क नंबर परिजनों को दर्ज करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वर्जन
घर में डिलीवरी होने से शिशु व मातृ मृत्यु दर बढ़ी है। इसको रोकने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उनका प्रयास रहेगा कि शत प्रतिशत डिलीवरी अस्पताल में हो ताकि मातृ व शिशु को किसी भी प्रकार दिक्कत होने पर तुरंत उसे उचित इलाज दिया जा सके।
-दिलबाग सिंह, जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन अधिकारी स्वास्थ्य विभाग नारनौल।