अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। पिछले छह माह से सरकोमा कैंसर से पीड़ित डेढ़ माह का भविष्य मौत से जंग हार गया। पिछले दो माह से उसका एम्स में इलाज चल रहा था। शनिवार की सुबह 3.15 बजे उसने दम तोड़ दिया। मजदूर पिता लोगों से कर्ज लेकर भी उसकी जान नहीं बचा सका। उसकी मौत के बाद मां परमिला का रो-रो कर बुरा हाल है।
मोहल्ला महायचान निवासी प्रवींद्र के डेढ़ वर्ष का पुत्र था। उसका आठ फरवरी को पहला जन्मदिन मनाया गया था। जन्मदिन के तीन चार दिन बाद उसे दाईं कनपटी पर फुंसी हो गई। उसे महेंद्रगढ़, नारनौल, रोहतक आदि के अस्पतालों में दिखाया गया, लेकिन फुंसी ठीक होने की बजाय बढ़ती गई। जयपुर के जेके लान अस्पताल में उसकी जांच करवाई तो वहां कैंसर बताया गया। धीरे-धीरे फुंसी एक बड़ा ट्यूमर बन गया, जिससे उसकी दायीं आंख बंद हो गई। पिता प्रविंद्र ने अपने बेटे के इलाज के लिए प्लाट बेच दिया और लोगों से लाखों रुपये का कर्जा भी ले लिया। पिछले दो माह से दिल्ली के एम्स में भर्ती भविष्य का इलाज हो रहा था। उसकी हालत में सुधार हुआ था। चिकित्सकों को भी लग रहा था कि उसकी हालत में आगे भी सुधार की संभावना है। रविवार को अचानक वह फिर बीमार हो गया और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। पिछले तीन दिन से वह वेंटीलेटर पर था। शनिवार को सुबह 3.15 बजे उसने दम तोड़ दिया।