नारनौल। गांव खातोली जाट में पीएलपीए बिल के विरोध को लेकर ग्रामीणों ने रविवार को बैठक की। बैठक में बिल को नांगल चौधरी के लोगों के जनभावनाओं के खिलाफ, किसान विरोधी व पर्यावरण विरोधी बताकर विरोध जताया गया। ग्रामीणों ने सरकार से बिल को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की। बिल को पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों के बचाव में बिल को संशोधन करके अरावली व वन भूमि को खुले तौर पर पूंजीपतियों के हक में देने वाला निर्णय बताया।
बैठक को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता तेजपाल यादव ने कहा कि कोर्ट में दायर याचिका में 12 दिसंबर 2018 के आदेशानुसार जिला महेंद्रगढ़ में स्टोन क्रेशरों के दूरी, मापदंड व डार्क जोन से जुडे़ पहलुओं की जांच पड़ताल चल रही है। प्रदेश सरकार ने 27 फरवरी को पीएलपीए बिल में संशोधन कर पारित किया। बिल के अनुसार महेंद्रगढ़ की वन भूमि व अरावली भूमि को रियल एस्टेट, बिल्डर, स्टोन क्रेशर व खनन के लिए किसी भी समय प्रयोग के लिए दी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 60 हजार एकड़ में वनभूमि में से 50 प्रतिशत केवल अरावली रेंज की भूमि है। बिल के पास होने से अरावली क्षेत्र की श्रृंखला का नांगल चौधरी क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन पूर्ण रूप से बिगड़ने का खतरा बताया। बैठक में दुर्गा प्रसाद, नरेंद्र कुुमार, सुबेदार लालाराम, दुर्गाराम, सुभाष नंबरदार, सुरजभान, इस्लाम खान, सज्जन टेलर, हवलदार लालाराम सहित सैकड़ों व्यक्ति मौजूद थे।