बिजली निगम के 42166 डिफॉल्टरों में अटके बिजली निगम के 121 करोड़ 34 लाख रुपये अटके हुए हैं। निगम ने ऐसे उपभोक्ताओं से पैसा वसूली के लिए कनेक्शन काटने का विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है।बिजली निगम के इन डिफॉल्टर की सूची में 853 सरकारी विभाग शामिल हैं। जिसमें सबसे अधिक संख्या जन स्वास्थ्य विभाग की है। 63 पंचायतें भी डिफॉल्टर लिस्ट में हैं।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के डिफॉल्टर की सूची लगातार बढ़ती ही जा रही है। बिजली निगम के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2019 में डिफॉल्टर की संख्या 35108 थी। जो अब 42166 पर पहुंच चकी है। बिजली निगम के डिफॉल्टरों की सूची में ग्रामीण उपभोक्ता सबसे अधिक संख्या में हैं। कनीना तथा महेंद्रगढ़ सब डिविजन में 24353 ग्रामीण क्षेत्र के डिफॉल्टर हैं। औद्योगिक क्षेत्र में सबसे कम 183 लोग ही डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं। बिजली निगम ने अपने अटके हुए इन पैसों की वसूली के लिए कनेक्शन काटने की योजना तैयार की है। जिसके लिए मुख्यालय से अनुमति ली जाएगी। इसके बाद यह विशेष अभियान चलाया जाएगा। निगम के आंकड़ों के अनुसार डिफॉल्टरों में 121 करोड़ 34 लाख रुपये बकाया है। बिजली निगम के अधिकारी समय समय पर बिल वसूली के लिए शिविर भी आयोजित करते रहे हैं। पंचायतों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करते रहे हैं। निगम के बिल न चुकाने वालों में सरकारी विभाग भी शामिल हैं। 853 सरकारी कार्यालयों में लगे कनेक्शन का बिल भुगतान भी नहीं हो रहा। जिस कारण यह डिफॉल्टर की सूची में हैं।
जनस्वास्थ्य विभाग सबसे ज्याद डिफॉल्टर
सरकारी विभागों की सूची में 853 डिफॉल्टर हैं। जिसमें महेंद्रगढ़ में 627 विभागों पर बिल बकाया है। कनीना उपमंडल में 226 विभाग डिफॉल्टर हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या जन स्वास्थ्य विभाग के जलघर की है। 482 जलघरों के कनेक्शन पर लंबे समय से बिल बकाया है। 63 पंचायत भी समय पर पैसा नहीं चुकाने के कारण डिफॉल्टर की लिस्ट में आ चुकी है।
वर्जन
बिजली निगम की ओर से समय समय पर लोगों को बिल भरने के लिए प्रेरित किया जाता है। बिजली निगम का करीब 90 करोड़ रुपये बिल के तौर पर डिफॉल्टर में फंसा है। भारी भरकम बिल वाले उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं के कनेक्शन भी काटे जाएंगे।
बुधराम पंवार, कार्यकारी अभियंता, डीएचबीवीएन, महेंद्रगढ़