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भ्रष्टाचार के साथ परिवारवाद, जातिवाद व हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हावी -विनोद बब्बर

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नारनौल। भारत विश्व का सबसे बड़ा और सफल लोकतंत्र है, लेकिन बदलते समय के साथ इसमें आ रही विकृतियां इसके भविष्य के लिए शुभ नहीं है। हुडा सेक्टर स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में रविवार को भारतीय लोकतंत्र दशा एवं दिशा विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक विनोद बब्बर ने उक्त विचार व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि आज भ्रष्टाचार के साथ परिवारवाद, जातिवाद, हिंसा और आतंक हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हावी हो गए हैं। वोट बैंक की राजनीति ने जाति और धार्मिक आधार पर होने वाले ध्रुवीकरण और तुष्टीकरण को बढ़ावा दिया है। हमारे संविधान निर्माताओं ने ऐसी स्थिति की शायद कल्पना भी नहीं की थी। राजनीतिक अपराधीकरण पर चिंता प्रकट करते हुए राष्ट्रवादी चिंतक आचार्य विवेक भारती ने कहा कि आज हमारा जनतंत्र धनतंत्र और गनतंत्र में बदल गया है, और बाहुबली राजनीति पर हावी हो गए हैं। जिसके कारण सच्चे और ईमानदार व्यक्तियों के लिए राजनीति में आना लगभग असंभव हो गया है।
पूर्व सांसद तथा जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोहर लाल सैनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए स्पष्ट किया कि पहले राजनीति सेवा होती थी लेकिन अब लाभकारी व्यवसाय बन कर रह गई है। पहले प्रत्याशियों के पास बहुत कम संसाधन होते थे। कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ा जाता था। लेकिन आज चुनाव बहुत खर्चीला हो गया है तथा पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। मूल्य और आदर्श राजनीति से गायब हो गए हैं। राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण तथा चुनावों में होने वाली हिंसा धांधली और धन के दुरुपयोग पर निराशा प्रकट करते हुए उड़ीसा के पूर्व डीजीपी दृगपाल सिंह चौहान ने कहा कि 70 वर्षों में भारतीय लोकतंत्र का चेहरा, चाल और चरित्र तीनों बदल गए हैं। आज उसकी दशा और दिशा दोनों चिंतनीय और चिंताजनक है। संगोष्ठी में मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी हिमांशु गुप्ता, कैलाश चंद शर्मा, महेंद्र सिंह गौड़, प्राचार्य डॉ. सुमेर सिंह यादव ने भी अपने विचार सांझा किए।
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संगोष्ठी के प्रारंभ में चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव ने अपने दोहों के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र की दिशा दशा और दिशा पर प्रभाव प्रकाश डाला। संगोष्ठी में डॉ. कृष्णा आर्य, डॉ. महिपाल सिंह, विपिन शर्मा, श्रवणदेव पाठक, कपिल यादव, दुलीचंद शर्मा, डॉ. राम अवतार यादव, राजकुमार शर्मा, महेंद्र कुमार वर्मा, संजय पाठक, किशन लाल शर्मा, गजानंद कौशिक, परमानंद दीवान, बलदेव सिंह चहल, सरदार संतोख सिंह, सत्यनारायण वर्मा, रामचंद्र यादव, उमेद पाल यादव, कृष्ण कुमार शर्मा, रामगोपाल अग्रवाल, ओम प्रकाश शर्मा, नवरत्न वर्मा व सत्यवीर चौधरी आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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