अमर उजाला ब्यूरो
निजामपुर। सरकार ने रबी की फसल को बेचने के लिए अपनी फसल अपना ब्योरा पर किसान पंजीकरण करवाना किसानों के लिए किसी आफत से कम नहीं है। किसान पंजीकरण किसानों के लिए गले की फांस बना हुआ है। दिनभर किसान साइबर कैफे व कॉमन सर्विस सेंटरों के चक्कर लगा रहे है।
खंड कार्यालय के अंतर्गत आने वाले गांव के किसान अपनी फसल अपना ब्योरा फसल बिक्री के लिए कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाने में भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अभी हाल में किसानों की जमीन के किला नंबर, जमीन की खेवट व खतौनी नंबर एक जनवरी 2019 से चेंज होने के कारण कॉमन सर्विस सेंटरों पर अपलोड नहीं हो पाया। इससे किसानों का आधार कार्ड भी डुप्लीकेट बताता है, न ही किसानों के पास मोबाइल पर किसी प्रकार का मैसेज नहीं आता। जबकि सरकार ने 25 दिसंबर को फसल बिक्री करने के लिए रजिस्ट्रेशन कार्य शुरू हुआ था। लेकिन यह साइट कॉमन सर्विस सेंटर पर नोट वर्किंग दिखाती है। ऐसे में दिनभर किसान सर्विस सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं। बगैर रजिस्ट्रेशन सरकार किसानों की फसल नहीं खरीदेगी।
कॉमन सर्विस सेंटर संचालक रविंद्र कुमार ने बताया जमीन के खेवट-खतौनी नंबर बदलने के कारण किसानों की फसल का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसानों को समस्या आ रही है। गिरदावर जगदीश प्रसाद ने बताया एक जनवरी को नई गिरदावरी हो पाई है। जिनमें खाता नंबर बदलने के कारण नए खाते नंबर से रजिस्ट्रेशन होगा।