फोटो संख्या:70- गांव नांगल माला की पहाड़ियों पर बना आश्रम--संवाद
सतनाली। गांव नांगल माला की पहाड़ी पर स्थित 114 वर्ष पुराने दंडी स्वामी बलभद्र आश्रम एवं संस्कृत पाठशाला को पुनर्जीवित करने का कार्य शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने मिलकर पहाड़ी तक पहुंचने के लिए नया रास्ता तैयार किया है। यह कार्य श्याम स्वरूप ब्रह्मचारी और कृष्ण स्वरूप ब्रह्मचारी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
समाजसेवी मनीष कौशिक और पूर्व सरपंच अजय शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों और संत समाज के सहयोग से इस ऐतिहासिक धरोहर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय संस्कृति, वेद शिक्षा और संत परंपरा से जुड़ सकें। आश्रम की प्राचीन कुटिया की पुताई के साथ-साथ आठ दिवसीय रामचरितमानस पाठ और कथा का आयोजन भी संपन्न हुआ।
इतिहास के अनुसार यह गुरुकुल वर्ष 1957 में दंडी स्वामी बलभद्र के वैकुंठ प्रस्थान के बाद धीरे-धीरे बंद हो गया था। 1958 में इसे पंडित सोहनलाल वैद्य की ओर से वर्तमान सरकारी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया। बताया जाता है कि दंडी स्वामी बलभद्र वर्ष 1912 में काशी में वेद अध्ययन के बाद यहां पहुंचे थे।
आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन पत्थर का तालाब, रसोईघर और विशाल जाल का पेड़ आज भी मौजूद हैं। तालाब के जीर्णोद्धार और जल संरक्षण के लिए लैंटर निर्माण सहित कार्य किए जा रहे हैं। यह तालाब क्षेत्र की जलापूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत भी माना जाता है, जिसमें राजावास नहर से पानी पहुंचता है।