महेंद्रगढ़। हैप्पी एवरग्रीन स्कूल की छात्रा महक ने 500 में से 495 अंक प्राप्त कर जिला टॉप किया है। महेंद्रगढ़ की मास्टर कॉलोनी निवासी महक डॉक्टर बनना चाहती है। पिता समरीत गोयल दुकानदार हैं और मम्मी सुधा गोयल निजी स्कूल में अध्यापिका हैं। महक ने बताया कि मैं स्कूल के बाद रूटीन में तीन से चार घंटे पढ़ती थी। परीक्षा के दौरान लगभग 15 घंटे की पढ़ाई करती थी। मैं परिणाम से संतुष्ट नहीं हूं। मुझे उम्मीद थी कि मैं हरियाणा टॉपर बनाऊंगी। मेरे सभी विषय में 100 प्रतिशत अंक हैं। अंग्रेजी में 95 अंक आए हैं। अंग्रेजी विषय का पेपर बहुत अच्छा हुआ था। अब पेपर को रिचेक करवाऊंगी। मम्मी निजी स्कूल में अध्यापिका हैं और घर पर ट्यूशन पढ़ाती हैं। इसलिए मैं भी मम्मी के साथ बच्चों को तीन घंटे ट्यूशन पढ़ाती हूं। उसके बाद मैं पढ़ती हूं। खाली समय पर मैं हमेशा घर पर मम्मी से बातें कर लेती थीं कभी टीवी भी देख लेती थी। मुझे कभी भी प्रोब्लम होती थी तो मैं स्कूल में टीचर से उसको पूछ लेती थी। मैं अपनी सफलता का श्रेय मम्मी-पापा, गुरुजनों को देती हूं। विशेषतौर पर स्कूल के एमडी मनीष अग्रवाल एवं विज्ञान अध्यापक अनिल वशिष्ठ को। दोनों मुझे समय-समय पर गाइड करते रहे।
सेल्फ स्टडी पर दिया पूरा ध्यान
आरपीएस स्कूल की छात्रा शालू ने 494 अंक प्राप्त कर जिले में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। गांव बचीनी निवासी शालू आईएएस बनना चाहती है। उसके पिता राजेश दुकानदार हैं और मम्मी मंजू देवी गृहणी हैं। शालू ने बताया कि मैं रूटीन में पांच से छह घंटे पढ़ाई करती थी। परीक्षा के दौरान पढ़ाई की अवधि बढ़ाकर दोगुनी कर दी थी। अध्यापक स्कूल में जो पढ़ाते थे उसी पर फोकस रखा। कोचिंग कभी नहीं ली बल्कि सेल्फ स्टडी पर पूरा ध्यान दिया। रिजल्ट से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हूं। मॉर्क्स ओर अधिक आना चाहिए था। एनटीएसई में मैं असफल होने के कारण टूट गई थी। अध्यापकों एवं परिजनों ने मुझे प्रोत्साहित किया। उसके बाद मैं आगे बढ़ी हूं। मैंने कभी नेट का प्रयोग नहीं किया और न ही सोशल मीडिया से जुड़ी। खाली समय में ड्राइंग बना लेती थी और कभी-कभी टीवी देख लेती थी। मैं अपनी सफलता का श्रेय परिजनों और गुरुजनों को देती हूं।
आईआईटी इंजीनियर बनना चाहता है अनुज
गांव डालनवास स्थित नालंदा स्कूल का छात्र अनुज ने 491 अंक प्राप्त कर जिले में तृतीय स्थान प्राप्त किया है। राजस्थान के झुंझुनू जिले के गांव जैतपुर निवासी अनुज आईआईटी इंजीनियर बनना चाहता है। उसके पिता अशोक किसान हैं जबकि माता सुनीता देवी गृहणी हैं। अनुज ने बताया कि रूटीन में पांच छह घंटे पढ़ाई करता था जबकि परीक्षा के दौरान 8 से 9 घंटे पढ़ाई करता था। मैं कभी भी सोशल मीडिया पर नहीं रहा। फेसबुक मुझे नहीं चलानी आती। जब पढ़ाई से मन हट जाता था तो भाई का मोबाइल थोड़ी देर के लिए चला लेता था। इसके अलावा क्रिकेट एवं चेस खेलने का मुझे शौक है। पढ़ाई के लिए मैंने नेट की सहायता ली। यू ट्यूब पर मै लेसन के वीडियो देखता था उसका बहुत फायदा मुझे मिला भी है। अधिकतर प्रोब्लम तो स्कूल में ही शार्ट आउट हो जाती थी। रिजल्ट से मैं संतुष्ट हूं। मैं अपनी सफलता का श्रेय माता पिता एवं गुरुजनों को देता हूं।