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प्रस्तावित हड़ताल से पूर्व ही रोडवेज कर्मचारियों ने किया चक्का जाम

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। रोडवेज यूनियनों के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारियों ने मंगलवार सायं चार बजे से ही नारनौल रोडवेज का चक्का जाम कर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों की यह हड़ताल 5 सितंबर रात 12 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर कर्मचारियों ने मंगलवार शाम चार बजे ही शुरू कर दी। हड़ताल शुरू होने की सूचना अन्य रूट से चलकर आ रहे नारनौल बस स्टैंड पहुंच रहे कर्मचारियों को लगी तो वे भी बसे बस स्टैंड में बस को खड़ी करके धरने पर बैठ गए। रोडवेज की अचानक हड़ताल के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल सूचना पाकर पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया और तुरंत प्रभाव में पुलिस बल को बस स्टैंड के बाहर तैनात किया गया। ताकि कोई अनहोनी घटना को रोका जा सके। हालांकि रोडवेज अधिकारियों ने कर्मचारियों की 5 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर पहले से ही तैयार कर ली थी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार नारनौल रोडवेज के बेड़े में कुल 161 बसें शामिल है। जिनमें से 145 बसें ऑन रोड हैं।
नारनौल डिपो प्रधान राजेश डांगी ने बताया कि रोडवेज यूनियनें काफी समय से मोटर व्हीकल संशोधन बिल-2017 और 700 बसें ठेेके पर लेने का विरोध कर रही हैं। इन मांगों को लेकर यूनियन प्रतिनिधियों की कई बार सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता भी हुई है, लेकिन हर बार वार्ता में कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनी। इसके विरोध में रोडवेज यूनियनों ने 7 अगस्त को प्रदेश में रोडवेज का चक्का जाम किया था। वहीं, 5 सितंबर को फिर से चक्का जाम होना था, परंतु केंद्रीय कमेटी के निर्देशानुसार कर्मचारी 4 सितंबर को शाम चार बजे चक्का जाम कर हड़ताल पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती। तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
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यूनियन नेताओं ने की नारेबाजी
रोडवेज की विभिन्न यूनियनों के नेता नारनौल रोडवेज डिपो प्रधान राजेश डांगी सहित अन्य कर्मचारी मंगलवार शाम चार बजे रोडवेज कार्यशाला के बाहर धरना देकर सरकारी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। डांगी ने कहा कि सरकार हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। सरकार कर्मचारियों की कोई मांगे नहीं मान रही है। रोडवेज यूनियनें प्राइवेट बसों को परमिट दिये जाने का पुरजोर विरोध कर रही है। इसके बावजूद सरकार इन प्राइवेट बसों के परमिट रद्द नहीं कर रही। जिसके कारण मजबूरी वश रोडवेज कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
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बोले यात्री
मुझे गुरुग्राम जाना था, लेकिन बस स्टैंड पर अचानक रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी है। अब मजबूरन निजी वाहन का सहारा लेना पड़ेगा।
- कुलदीप
- मैं निजी कार्य से नारनौल आई थी। अब मुझे अटेली जाना है। परंतु बस स्टैंड पर आकर देखा तो यहां जाने के लिए कोई रोडवेज बस नहीं है।
- हैप्पी कुमारी
- किसी निजी कार्य से नारनौल आया था। अब काम निपटाकर अपने घर अटेली जाने के लिए बस स्टैंड पर पहुंचा था। यहां देखा तो सभी बसे खड़ी है। कोई भी रोडवेज बस नहीं जा रही है। इससे परेशानी हुई है।
- मुकेश कुमार
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