कुरुक्षेत्र। हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में लागू किए गए 35 प्रतिशत विषय ज्ञान परीक्षा के क्राइटेरिया के लिए युवाओं में भारी रोष देखने को मिल रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि यह नियम न तो पारदर्शी है और न ही व्यावहारिक। इससे कई मेधावी और मेहनती छात्र मुख्य परीक्षा या इंटरव्यू की दौड़ से बाहर हो रहे हैं, जो उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
एचपीएससी की ओर से हाल ही में लागू किए गए 35 प्रतिशत सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट के नियम ने हजारों युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा में समग्र मेरिट का आकलन होना चाहिए, न कि किसी एक सेक्शन में न्यूनतम अंक की बाध्यता लगाकर छात्रों को बाहर किया जाए।
युवाओं का कहना है कि इस नियम को लागू करने से पहले न तो व्यापक चर्चा की गई और न ही अभ्यर्थियों को मानसिक रूप से इसके लिए तैयार किया गया। कई छात्र संगठनों ने इस क्राइटेरिया को वापस लेने या इसमें संशोधन की मांग की है। इससे पहले 13 जनवरी को भी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परिसर में छात्र संगठनों ने मिलकर रोष मार्च निकाला था और इस निर्णय का विरोध किया था।
मेहनती छात्रों का मनोबल तोड़ने वाला है नियम
अभ्यर्थी सतबीर सिंह ने बताया कि मैंने लिखित परीक्षा में कुल मिलाकर अच्छे अंक हासिल किए हैं लेकिन सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट में 35 प्रतिशत से थोड़ा कम अंक आने के कारण मैं बाहर हो गया। यह नियम मेहनती छात्रों का मनोबल तोड़ने वाला है।
एचपीएससी को इस पर करना चाहिए पुनर्विचार
तैयारी कर रही अमनप्रीत का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं पहले से ही काफी कठिन होती हैं। ऐसे में इस तरह के क्राइटेरिया जोड़ना सही नहीं है। कई बार एक सेक्शन में कम अंक आ सकते हैं लेकिन कुल प्रदर्शन बेहतर होता है। एचपीएससी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कुरुक्षेत्र। अमनप्रीत।