गांव लुखी के लापता जोनी का शव सात दिन बाद करनाल के पास गांव चमारखेड़ा नहर से शुक्रवार को बरामद हुआ। शव गांव में पहुंचते ही जोनी की पत्नी प्रीति, पिता सुरेंद्र, दादा रती राम और दादी का विलाप करने लगे। जोनी की पत्नी बार बार जोनी के शव के साथ लिपट कर बेहाल हो रही थी जिसे देखकर वहां मौजूद सभी की आंखें नम हो गई। गमगीन माहौल में जोनी का गांव में श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। बता दें कि सात दिन पहले जोनी घर से भिवानीखेड़ा बैंक से पैसे निकलवाने के लिए बाइक पर निकला था, लेकिन देर रात तक भी वापस घर नहीं लौटा। जोनी की बाइक लावारिस अवस्था में भाखड़ा नहर की पटरी पर मिली थी। कयास लगाया जा रहा था कि जोनी ने नहर में छलांग लगाई होगी, इसी आशंका के चलते जोनी के परिजन दिन रात भाखड़ा नहर पर बने किरमिच हैड पर पहरा दे रहे थे। परिजनों ने दबखेड़ी से लेकर चमारखेड़ा तक भाखड़ा नहर के चप्पे चप्पे की छानबीन कर ली थी, लेकिन जोनी का कोई सुराग नहीं लगा था। वीरवार को केडीबी के गोताखोर भी नहर के पानी में उतरा था, लेकिन गोताखोर सिलेंडर की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण औपचारिकता निभाने के बाद वापिस लौट गया था। परिजनों को उम्मीद थी कि उनका लाडला जीवित होगा, लेकिन शुक्रवार को चमारखेड़ा के पास भाखड़ा नहर में किसी युवक का शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। जिसकी सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे तथा शव की शिनाख्त की। जोनी के शव को नहर से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी अस्पताल में लाया गया। जहां पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। उधर, जोनी की छोटी बेटी रितिका को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह गुमसुम आंखों से सब कुछ देख रही थी।
तीन घंटे देरी से पहुंची पुलिस
गांव के नंबरदार ओमप्रकाश ने बताया कि तकरीबन 10 बजे उन्होंने जोनी के शव को भाखड़ा नहर में मिलने की सूचना झांसा पुलिस और थाना सदर पुलिस को दे दी थी। पुलिस सूचना मिलने के तकरीबन तीन घंटे देरी से पहुंची। इस दौरान वे धूप में पुलिस का इंतजार करते रहे। झांसा पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक जयकुमार ने गोताखोर परगट सिंह की मदद से जोनी के शव को भाखड़ा नहर से निकाला।