कुरुक्षेत्र। केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान-भारत (एनआईएफ) की ओर से देशभर के स्कूली विद्यार्थियों के लिए इंस्पायर अवॉर्ड-मानक योजना 2025-26 के लिए नामांकन शुरू कर दिए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी अपने मौलिक, नवीन और विज्ञान-आधारित विचार प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवोन्मेषी सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना है, ताकि वे भविष्य में समाज और देश की तकनीकी प्रगति में योगदान दे सकें। जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. तरसेम कौशिक ने बताया कि इस योजना का लाभ सरकारी और निजी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले सभी विद्यार्थी उठा सकते हैं। प्रत्येक स्कूल अधिकतम पांच आइडिया भेज सकता है जिनमें कक्षा 11वीं और 12वीं (विज्ञान संकाय) के अधिकतम दो आइडिया शामिल हो सकते हैं। विचार मौलिक, व्यावहारिक, समाजोपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल होने चाहिए।
इसके अंतर्गत नवाचार जैसे ऐसी नई मशीन या उपकरणों के कॉन्सेप्ट जो अभी मौजूद नहीं हैं, मौजूदा मशीनों या गैजेट्स में सुधार करके उन्हें अधिक प्रभावी और बहु-उपयोगी बनाना। ऐसे नवाचार (मशीन, उपकरण, एप आदि) जो स्थानीय तकनीकी समस्याओं का समाधान करें इत्यादि नवाचारों को भेजा जा सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर 60 विद्यार्थी चयनित होंगे
नोडल अधिकारी डॉ. तरसेम कौशिक ने बताया कि पहले चरण में विद्यालय स्तर पर आइडिया प्रतियोगिता आयोजित होगी। इसमें से श्रेष्ठ पांच आइडिया चयनित कर वेब पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। तत्पश्चात चयनित विद्यार्थियों को सरकार की ओर से 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी ताकि वे अपने मॉडल या वैज्ञानिक प्रोजेक्ट तैयार कर सकें। विद्यार्थियों के बनाए गए प्रोजेक्ट एवं मॉडल जिला एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की ओर से ही प्रस्तुत किए जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर 60 विद्यार्थी चयनित होंगे जिन्हें राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित किया जाएगा तथा उन्हें जापान जाने का अवसर भी प्राप्त होगा।
बच्चों को इस योजना में भाग लेने के लिए करें प्रेरित
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने कहा कि इंस्पायर अवॉर्ड-मानक योजना केवल पुरस्कार जीतने का अवसर नहीं है बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए अपनी सोच को हकीकत में बदलने का मंच है। आज के दौर में विज्ञान और तकनीक में नवाचार ही समाज के विकास की कुंजी है और इस योजना के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक उम्र में ही समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का अवसर मिलता है। उन्होंने सभी स्कूल मुखियाओं, शिक्षकों और अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को इस योजना में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।