कुरुक्षेत्र। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के समापन के बाद धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के केशव पार्क में महायज्ञ के लिए खास तौर पर यज्ञशाला तैयार की जाएगी, जिसमें 18 मार्च से लगातार 10 दिन तक हवन किए जाएंगे। इसके लिए 1008 हवन कुंड तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें करीब तीन हजार किलोग्राम देसी घी, 100 क्विंटल हवन सामग्री से हवन किया जाएगा। हवन करवाने के लिए भी हरियाणा के विभिन्न जिलों के साथ-साथ वृंदावन, उत्तराखंड, राजस्थान सहित आसपास के अन्य प्रदेशों से 2000 विद्वान ब्राह्मण पहुंचेंगे।
महायज्ञ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व मध्य प्रदेश आदि राज्यों के मुख्यमंत्री भी आहुतियां डालने पहुंचेंगे। महायज्ञ के पहले ही दिन जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद भी पहुंचेंगे। काशी सुमेरू पीठ के शंकराचार्य के भी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। प्रयागराज महाकुंभ में गए संत-महापुरूषों को भी निमंत्रण दिया गया है और संभावना जताई जा रही है कि एक हजार से ज्यादा संत-महापुरूष पहुंचेंगे।
इस आयोजन के चलते त्रिपुरा पीठाधीश्वर चक्रवर्ती श्री श्री 1008 हरिओम महाराज शनिवार को केशव पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने ध्वजा रोहण किया। इससे पहले सतपाल महाराज ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ पहुंचे स्वामी संजय ब्रह्मचारी व व्यवस्था में जुटे हरीश कुमार ने बताया कि महायज्ञ की तैयारी पिछले करीब 15 दिन से की जा रही है। अक्सर ऋषिकेश के टाइगर रिजर्व में समय व्यतीत करने वाले श्री श्री 1008 हरिओम महाराज ने 108 महायज्ञ करवाने का संकल्प लिया है जिससे तहत ही 18 मार्च से केशव पार्क में यह आयोजन किया जा रहा है। यह पहला मौका है जब यज्ञशाला में 1008 हवन कुंड बनाए जाएंगे। यह उनका 102वां महायज्ञ होगा, जिसका उद्देश्य मानव कल्याण के लिए और वातावरण की शुद्धि ही है। अब तक वे 23 प्रदेशों में 101 महायज्ञ कर चुके हैं। इनमें केशव पार्क में ही वर्ष 2017 व 2018 में 108 कुंडीय व 2021 में 501 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया था।
महाशिवरात्रि पर महाकुंभ से लाया जाएगा जल
पीठाधीश्वर चक्रवर्ती श्री श्री 1008 हरिओम महाराज अन्य संतों के साथ 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के मौके पर प्रयागराज महाकुंभ में जाकर स्नान करेंगे। वे वहां से जल लेकर लौटेंगे, जो धर्मनगरी स्थित पवित्र ब्रह्मसरोवर में पूरी विधि विधान व मंत्रोच्चार के साथ समाहित किया जाएगा ताकि जो लोग प्रयागराज महाकुंभ जाने में नहीं जा सके वे यहां स्नान कर वहीं पुण्य के भागीदार बन सकेंगे।
हमें शुद्ध पर्यावरण और प्रकृति से जोड़ता है यज्ञ : स्वामी हरिओम
यज्ञ सम्राट स्वामी हरिओम ने बताया कि इस यज्ञ का उद्देश्य समस्त मानव जाति का कल्याण और कुरुक्षेत्र की महाभारत काल से चली आ रही सनातन परंपरा, धर्म कर्म और मोक्ष के संदेश से लोगो को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज विश्व और समाज अनेक विकारों से ग्रस्त है। यहां प्रदूषण समेत लोगों में मानसिक विकृतियां बढ़ रही हैं। यज्ञ एकमात्र ऐसा माध्यम है जो न केवल हमें शुद्ध पर्यावरण और प्रकृति से जोड़ता है बल्कि महामारियों से हमारी रक्षा करता है।
हवन से पर्यावरण हो जाता है शुद्ध : प्रो. जितेंद्र
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. जितेंद्र शर्मा का कहना है कि हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान से पर्यावरण शुद्ध हो जाता है। लगातार आयोजन से और भी ज्यादा असर पड़ता है। हवन करने से आसपास के वातावरण में फैले बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। हवन में शामिल की जाने वाली सामग्री में कई औषधीय गुण होते हैं।