कुरुक्षेत्र। विश्व जूनोसिस दिवस संस्थान की निदेशक प्रो. नीरा राघव जानकारी देते हुए। संस्थान
कुरुक्षेत्र। पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सोमवार को विश्व जूनोसिस दिवस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज में संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसून के दौरान रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। समय पर टीकाकरण और सावधानी ही इनसे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
संस्थान की निदेशक प्रो. नीरा राघव ने बताया कि विश्व जूनोसिस दिवस हर वर्ष 6 जुलाई को वैज्ञानिक लुई पाश्चर की ओर से पहली रेबीज वैक्सीन के सफल परीक्षण की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि रेबीज से बचाव के लिए पालतू पशुओं का समय पर टीकाकरण और संक्रमित पशु के काटने या खरोंचने पर तुरंत उपचार कराना जरूरी है। एक बार लक्षण दिखाई देने के बाद इस बीमारी में मृत्यु का खतरा लगभग 100 प्रतिशत होता है।
डॉ. सुखबीर लाल खोखरा ने कहा कि रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए मानव स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और पर्यावरण के क्षेत्र में मिलकर काम करना जरूरी है। डॉ. मंजूषा ने वैक्सीन विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग की जानकारी दी, जबकि डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने इन बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में एम. फार्मेसी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने लोगों से मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने, पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराने और एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग नहीं करने की अपील की।
कुरुक्षेत्र। विश्व जूनोसिस दिवस संस्थान की निदेशक प्रो. नीरा राघव जानकारी देते हुए। संस्थान