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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस आज : मिलावटी खाने और जंक फूड की लत से बढ़ रही बीमारियां

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प्रदीप पिलानिया
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कुरुक्षेत्र। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस सात जून हमें याद दिलाता है कि सुरक्षित भोजन हर इंसान का अधिकार है, लेकिन इसके लिए न केवल किसानों, बल्कि व्यापारियों, उपभोक्ताओं और नीति-निर्माताओं को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। आज यह सवाल हर किसी के सामने है कि क्या हम सचमुच खुद को और अपनी संतानों को सुरक्षित भोजन दे पा रहे हैं।
खाद्य आपूर्ति विभाग की ताजा जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पिछले साल दुकानों और रेहड़ियों से लिए गए खाद्य पदार्थों के 17 नमूने गुणवत्ता के मापदंडों पर खरे नहीं उतरे। विभाग के निरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि सबसे ज्यादा मिलावट दूध और दूध से बने उत्पादों में पाई गई। व्यापारी मुनाफे के लिए दूध में रासायनिक रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अदालत तक 70 फीसदी मामले रंगों से जुड़े पहुंचे हैं। पिपली में दूध से खाद्य पदार्थ बनाने की फैक्टरी से लिए गए सभी नमूने भी जांच में फेल हो गए, जहां घी और पनीर में मिलावट की पुष्टि हुई। वे बताते हैं कि कोई भी फूड कारोबार करने से पहले पंजीकरण व लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
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जंक फूड की लत से सेहत पर खतरा : डॉ. शैली
युवाओं से लेकर उम्रदराज लोगों में जंक फूड और बाहर के खाने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यह स्वादिष्ट लगने वाला खाना जानलेवा साबित हो सकता है। पूर्व सिविल सर्जन और फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि जंक फूड के कारण फूड प्वाइजनिंग के मामले बढ़ रहे हैं। इसके अलावा मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसी गंभीर बीमारियां भी आम हो रही हैं। संवाद
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