संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मीरी-पीरी अस्पताल शाहाबाद के संबंध में एसजीपीसी पदाधिकारियों की ओर से बयानबाजी करना किसी भी स्तर पर सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार हरियाणा राज्य में जितनी भी चल अचल संपत्ति एसजीपीसी की है, उस पर हरियाणा कमेटी का अधिकार है और मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल गुरुद्वारा श्री मस्तगढ़, शाहाबाद की भूमि पर बना हुआ है, जिसे एक प्राइवेट ट्रस्ट बनाकर चलाया जा रहा है।
इस कॉलेज एवं अस्पताल की सेवा संभाल जल्द ही हरियाणा कमेटी लेगी लेकिन कुछ कानूनी अड़चनों के कारण देरी हो रही है। यह कहना है हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के सदस्य जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल का। वे शुक्रवार को कमेटी मुख्यालय पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मीरी-पीरी के मालिक साहिब श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज के प्रकाश उत्सव में शामिल होने का न्योता प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा द्वारा दिया जा रहा है। गत दिवस ही उन्होंने दिल्ली की सीएम एवं इससे पहले सिरसा में अलग-अलग संत महापुरुषों व राजनीतिक प्रतिनिधियों को निमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही हरियाणा कमेटी के पास 100 करोड़ का बजट ही है लेकिन यूनिवर्सिटी बनाने के लिए संगत का सहयोग लिया जाएगा और संगत के समक्ष एक हजार करोड़ रुपये का बजट कोई मायने नहीं रखता।
सिखों पर अत्याचार के विरोध में काली दस्तार सजाई : कमेटी के प्रधान जत्थेदार झींडा ने कहा कि संस्था ने शहीदी दिवस पर शहीदों को याद किया है। छह जून 1984 को श्री अकाल तख्त साहिब एवं श्री दरबार साहिब को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया। आज के दिन संत जरनैल सिंह भिंडरा वाले, भाई अमरीक सिंह, जनरल शुबेग सिंह, बाबा ठारा सिंह को शहीद किया गया। मासूम संगत को भी नहीं बख्शा गया था।