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Kurukshetra News: नगर परिषद हाउस की बैठक न होने से अटके 10 करोड़ के काम

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। नगर परिषद की बैठक में उपजा विवाद थम नहीं रहा है। दोनों पक्षों की ओर से अब इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाने लगा है। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर कार्रवाई के लिए अड़े हैं।
ऐसे में पूरे शहर के लिए विकास का केंद्र मानी जाती रही नगर परिषद राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन गई है, जिसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। करीब 10 करोड़ तक के विकास कार्य अटके हुए हैं जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। करीब चार साल पहले 25 मई 2021 को तत्कालीन नप अध्यक्ष उमा सुधा का कार्यकाल खत्म हो गया था, जिसके बाद से ही चुनाव होने का लोग इंतजार करते रहे ताकि हाउस बनने के बाद विकास कार्यों में तेजी आ सके।
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गत दो मार्च को चुनाव और 12 मार्च को परिणाम आने के बाद माफी ढांडा अध्यक्ष बनीं। सभी 32 वार्डों को पार्षद भी मिले। इससे लोगों की विकास कार्यों की उम्मीद जागी लेकिन ये उम्मीदें आज तक पूरी नहीं हो पाई है। नगर परिषद तीन बार बैठक बुला चुकी है लेकिन पहली बैठक में शुरू हुआ विवाद बढ़ता गया। अब दूसरी व तीसरी बैठकें भी विवाद की भेंट चढ़ गईं, जिसके चलते वित्त कमेटी का गठन नहीं किया जा सका।
ढाई से 10 करोड़ तक के विकास कार्यों की पावर : जून 2023 में जारी अधिसूचना के मुताबिक नगर निकाय में फाइनेंंस एवं कांट्रेक्ट कमेटी का गठन किया जाना जरूरी है, जिसमें प्रधान, उपप्रधान, पार्षदों की सहमति से दो सदस्यों को शामिल किया जाता है। इसमें नप के कार्यकारी इंजीनियर व एमई को भी शामिल किया जा सकता है।
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इस कमेटी को ही ढाई से 10 करोड़ तक के विकास कार्यों पर मुहर लगाने की पावर है। पार्षदों द्वारा सड़क निर्माण से लेकर पार्क तक के निर्माण, नवीनीकरण जैसे विकास कार्यों का खाका नप प्रशासन को सौंपा जाता है, जिन पर हाउस में चर्चा के बाद बजट के लिए अंतिम मुहर के लिए उक्त कमेटी के पास भेजा जाता है।
नप हाउस की गत 23 और उसके बाद 28 मई को होने वाली बैठक में इसी कमेटी का गठन किया जाना था, ताकि विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
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