कुरुक्षेत्र। नाथद्वारा में गीता महोत्सव के दौरान केडीबी सदस्यों का सम्मान करते आयोजक। स्वयं
कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में शामिल होकर प्रवचनों का आनंद लिया। प्रवचनों में सत्या भारती ने आध्यात्मिक विचारों से भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि मन विचारों का समूह है लेकिन मन का कोई अपना अस्तित्व न होते हुए भी यह शक्तिशाली है। वाणी और कर्म मन के विचारों के अनुरूप ही होता है।
उन्होंने कहा कि समाज की स्थिति को सुधारना है तो प्रत्येक मनुष्य को अपनी मनोस्थिति पर कार्य करना ही होगा। ब्रह्मज्ञान मन के विकारों को सहज रूप से ही दग्ध करने के लिए सक्षम है। यदि ब्रह्मज्ञान रूपी संजीवनी है और निरंतर गुरु आज्ञा में चलते हुए ध्यान साधना की ओर से आत्म साक्षात्कार करते हैं तो निश्चित ही मन के विकारों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। ब्रह्मज्ञान रूपी विद्या के माध्यम से आत्मा अपने वास्तविक सच्चिदानंद स्वरूप से जुड़ जाती है। गुरु सत्संग, सेवा, साधना, सुमिरन की ओर से अपने शिष्य के संचित कर्मों का क्षय करके उसके प्रारब्ध की पीड़ा को कम कर देते हैं। इससे मुक्ति के आनंद को जीवन रहते ही प्राप्त कर लेता है। सत्संग के बाद विश्व शांति के लिए सामूहिक ध्यान साधना करते हुए प्रेरणादायी भजन सुनाए गए।