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योग प्राचीन पद्धति ही नहीं बल्कि जीवन जीने की एक अद्भुत कला : बलदेव धीमान

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योग प्राचीन पद्धति ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। योग करने से शरीर को मानसिक बल मिलता है और विचारों में दृढ़ता आती है। मोक्ष तक का मार्ग योग से मिलता है। आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव धीमान लघु सचिवालय के सभागार में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आठवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन एवं आयुष विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में योग की सोच पैदा होगी तो निश्चित ही युवा पीढ़ी स्वस्थ और संस्कारवान होगी। योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है, यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है। वहीं उपायुक्त मुकुल कुमार ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि शरीर, मन और आत्मा को नियंत्रित करने में योग मदद करता है। शरीर और मन को शांत करने के लिए यह शारीरिक और मानसिक अनुशासन का एक संतुलन बनाता है। यह तनाव और चिंता का प्रबंधन करने में भी सहायता करता है। योगासन शक्ति, शरीर में लचीलेपन और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए जाना जाता है। इस मौके पर सीटीएम चंद्रकांत कटारिया, आयुष विवि के रजिस्ट्रार नरेश भार्गव, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. सुदेश जाटियान, रोशन लाल, आचार्य सतीश, नप अधिकारी केएल बठला सहित अन्य मौजूद रहे।
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