कुरुक्षेत्र। प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक लोक कलाओं को जीवंत रखने के उद्देश्य से कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा कला कीर्ति भवन में शुक्रवार से तीन दिवसीय सांझी कार्यशाला शुरू की, जिसमें महिलाओं ने सांझी बनाने के गुर सीखे। कार्यशाला का शुभारंभ प्रदेश कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने किया।
महेश जोशी ने कहा कि सांझी हरियाणा की मिट्टी से जुड़ी एक बेहद अनूठी और पावन कला है, जो हमारी ग्रामीण संस्कृति और लोक चेतना को दर्शाती है। आधुनिकता के दौर में इस तरह की पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। कार्यशाला प्रशिक्षक मीनाक्षी ने बताया कि सांझी कला केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि हमारी लोक आस्था और त्योहारों से जुड़ा एक जीवंत माध्यम है, जिसे सहेजना हम सभी का दायित्व है। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में कुरुक्षेत्र और उसके आसपास के क्षेत्रों की लगभग 15 छात्राओं और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया है।
कार्यशाला के दौरान इन प्रतिभागियों को हरियाणा की पारंपरिक लोक कला सांझी बनाने के बारीक गुर सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान मिट्टी की तैयारी, आकृतियों को उकेरना, पारंपरिक रंगों का चयन और सांझी के गीतों के सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस शिविर में महिलाएं रविवार को कार्यशाला के समापन पर अपनी रचनात्मकता को दीवारों पर उतारेंगी। उद्घाटन अवसर पर कार्यशाला सहायक मुस्कान, कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल, ललित कला समन्वयक सीमा काम्बोज, विकास शर्मा, सुरेखा मखीजा, वेदिता, सोनिया शर्मा, जयवंती भारद्वाज, सुदेश कुमारी आदि मौजूद रहे।