प्रदीप पिलानिया
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुवि) के महिला अध्ययन अनुसंधान केंद्र ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय कार्य कर रहा है। पूर्व छात्र एसोसिएशन के सहयोग से चल रहे केंद्र में महिलाएं पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को उपयोगी वस्तुओं जैसे बैग, चटाई और घरेलू सजावट की सामग्री में बदल रही हैं। इस नवाचार से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिल रहा है, बल्कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त भी हो रही हैं।
केंद्र की ओर से छह गांवों में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र और दो गांवों में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए गए हैं। यहां महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद कई महिलाएं अपने घरों से काम शुरू कर चुकी हैं, जबकि कुछ ने अपने बुटिक खोलकर स्थानीय बाजार में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। महिला अध्ययन अनुसंधान केंद्र की निदेशक प्रो. अनीता दुआ ने बताया कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, पहचान बना रही है। संवाद
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30 गांवों में केंद्रों को बदला गया
डॉ. वंदना ने बताया कि शुरुआत में कई गांवों में महिलाओं की उदासीनता के चलते विश्वविद्यालय को सिलाई सेंटर बंद करने पड़े और उन्हें अन्य गांवों में स्थानांतरित करना पड़ा। चुनौतियों के बावजूद विश्वविद्यालय की यह प्रेरक पहल न्यू मिर्जापुर कॉलोनी, गुलजारीलाल नंदा केंद्र, दयालपुर, मिर्जापुर समेत आठ गांवों में जारी है। जहां महिलाएं कई कोर्स का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
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काम सीखकर बनीं ट्रेनर, अब खुद कर रहीं रोजगार सृजन
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कुछ महिलाएं अब खुद ही ट्रेनर बन चुकी है। वह अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं। मिर्जापुर सेंटर की ट्रेनर रानी ने बताया कि पहले उन्होंने काम सीखा और अब वह न केवल कपड़े सिल रही हैं, बल्कि अपने बनाए सामान की बिक्री से प्रतिदिन 500-600 रुपये कमा रही हैं।
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गीता जयंती पर स्टाल के जरिए मिलेगा बड़ा मंच
डॉ. वंदना ने बताया कि इस बार गीता जयंती महोत्सव में विश्वविद्यालय की ओर से इन महिलाओं के लिए एक स्टाल लगाया जाएगा, जहां वे अपने बनाए उत्पादों की बिक्री करेंगी। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की मार्केटिंग करना और ग्राहकों से सीधे संवाद करना भी सिखाया जाएगा, जो भविष्य में उनके व्यवसाय को नई ऊंचाई देगा।