लड़का होने की दवाई देने वाले झोलाछाप डॉक्टर को पकड़ने गई स्वास्थ्य विभाग की टीम का ग्रामीणों घेराव कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर टीम में शामिल सदस्यों को मुक्त करवाया। बाद में पुलिस ने लड़का होने की दवा देने के आरोप में एक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली थी कि पूंडरी के गांव करोड़ा में एक झोलाछाप डॉक्टर लड़का होने की दवाई देता है। जिसको पकड़ने के लिए एक टीम का गठन किया गया। टीम में उप सिविल सर्जन नीलम कक्कड़, डा. नीरज मंगला, डीपीएम नरेंद्र कुमार, बीईई राजेश कुमार शामिल थे।
टीम ने फर्जी ग्राहक तैयार कर मौके गांव करोड़ा की उस बस्ती में स्थित झोला छाप डॉक्टर राममेहर के पास भेजा। राममेहर ने उनसे दो सौ रुपये लिए उन्हें तीन पुड़िया दी और कहा कि रोजाना एक पुड़िया सुबह गाय के दूध के साथ लेनी है। जैसे ही राममेहर उन्हें दवाई दे रहा था। उसी समय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दबिश दे दी। कार्रवाई पूरी करने के बाद जैसे ही टीम सदस्य वहां से निकलने लगे तो उन्हें लोगों ने वहीं रोक लिया। लोगों ने आरोपी डॉक्टर के केस को खत्म करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
बाद में अधिकारियों ने एसपी व डीसी को सूचित किया। बाद में भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंच कर टीम के सदस्यों को सुरक्षित गांव से बाहर निकाला। इसके बाद उप सिविल सर्जन नीलम कक्कड़ की शिकायत पर पूंडरी पुलिस स्टेशन में गांव करोड़ा निवासी राममेहर पुत्र नफे सिंह के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया गया।
बुलाने पर भी नहीं पहुंची थी पहले टीम
जब स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव करोड़ा में लड़का होने की दवाई देने वाले आरोपी को पकड़ने गई थी तो उसने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि वह मौके पर पहुंच जाएंगे। लेकिन पुलिस चुनाव के कारण मौके पर नहीं पहुंची ओर जिसका खामियाजा स्वास्थ्य विभाग की टीम को भुगतना पड़ा।