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बिना बिजली और इंधन ऊर्जा के जलशोधन करेगा यंत्र

Wed, 11 Jan 2017 12:13 AM IST
ब्यूर/अमर उजाला/कुरुक्षेत्र
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without electricity, technology - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अब वाटर प्यूरीफायर से पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए भारी मात्रा में बिजली व इंधन खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। लोगों को ऐसा जल शोधक यंत्र उपलब्ध होगा, जो बिना बिजली व इंधन ऊर्जा के ही काम करेगा। इससे शुद्ध किए गए पानी से न केवल मानव निरोगी बनेगा बल्कि फसलों की उत्पादकता भी कई गुण बढ़ जाएगी। यह यंत्र किसी वैज्ञानिक व इंजीनियरिंग संस्थान ने नहीं बल्कि सातवीं क्लास फेल रहे कैथल जिले के गांव सौंगल निवासी किसान लक्ष्मण सिंह ने ईजाद किया है।

जिसे महादेव नीलकंठ जल शोधक यंत्र नाम दिया गया है। करनाल व चंडीगढ़ में विभिन्न प्रयोगशालाओं में इसे सही पाए जाने पर अब लक्ष्मण सिंह इस यंत्र को बनाने की तकनीक के गुर प्रदेश भर के बी टेक व एम टेक छात्रों को देंगे। इसके लिए बाकायदा कृषि विभाग कार्यालय में 17 जनवरी से तीन माह के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया जाएगा। विशेष तौर पर जिला उपायुक्त की अनुमति व निर्देशों पर लगाए जाने वाले इस शिविर में विभिन्न इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे।
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इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई है तो वहीं कृषि विभाग भी उनका पूरा सहयोग कर रहा है। तय की गई योजना के अनुसार इस शिविर में भाग लेने वाले छात्र ब्लॉक व गांव स्तर पर इस तकनीक की जानकारी आम लोगों को भी देंगे और यह यंत्र आम लोग भी तैयार कर सकेंगे तो वहीं उक्त छात्र अपना रोजगार भी शुरू कर सकेंगे।                  
                
नीलकंठ यंत्र मानव व फसलों के लिए रामबाण : लक्ष्मण                                    
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में प्रशिक्षण शिविर की तैयारियों में जुटे लक्ष्मण सिंह का दावा है कि करीब छह माह में तैयार किए गए नीलकंठ जल शोधक यंत्र मानव व फसलों के लिए रामबाण साबित हुआ है। इसका पहले प्रयोग किया गया और करनाल व चंडीगढ़ स्थित लैब में इसका टेस्ट भी किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह यंत्र प्राकृतिक रूप से जल शोधन करता है, जिसके लिए बिजली व अन्य इंधन की भी जरूरत नहीं होगी। इसका शोध किया गया जल मनुष्य की पेट में गैस, कब्ज, मोटापा, बाय, जोड़ों का दर्द, ब्लड प्रैशर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां दूर करने में समक्ष है तो वहीं इसके बचे हुए पानी से पेड़-पौधे रसायनिक व जैविक खाद की अपेक्षा 5 से 7 गुणा अधिक उत्पादकता देने में समक्ष होते है।                  
 
गीता जंयती समारोह में भी किया हैरान                  
दिसंबर में हुए अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह के दौरान भी लक्ष्मण सिंह ने प्रदर्शनी लगा सभी को हैरान कर दिया था। उसने उक्त यंत्र के पानी से विशेष तौर से गन्ने की तैयार की 22.6 फीट पैदावार का प्रदर्शन किया, जिसे अनेकों कृषि वैज्ञानिकों ने भी सराहा तो वहीं किसानों व अधिकारियों में भी वे चर्चा का विषय बने रहे थे।                  
              
राम-लक्ष्मण नाम से दिया गणित का फार्मूला                  
लक्ष्मण सिंह ने उक्त जलशोधक यंत्र ही नहीं बल्कि बिजली बचाने के कई अन्य यंत्र भी ईजाद किए है। यही नहीं उसने बड़ी से बड़ी गणना करने के लिए राम-लक्ष्मण नाम से गणित का फार्मूला भी दिया है। वह अनेक स्कूलों व कॉलेजों में भी इस फार्मूले को लेकर छात्रों की कक्षाएं लेते रहे है तो वही कई बार प्रदेश व केंद्र सरकार से सम्मानित भी हो चुके है। यहां तक की उनकी ईजाद की गई कई तकनीक का पेटेंट भी उन्हें मिल चुका है। उनका कहना है कि जल शोधक यंत्र घर में पीने के पानी के लिए छोटे स्तर पर तो कृषि के लिए बड़े स्तर पर भी बनाया जा सकता है।
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छात्रों को दिया जाएगा प्रशिक्षण : उपनिदेशक                  
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि लक्ष्मण सिंह ने पहले यह प्रयोग विभिन्न विभाग व प्रशासन को दिखाए है। जिला उपायुक्त ने भी उन्हें स्वीकृति दी है ओर यहां वे एमटेक व बीटेक बच्चों को यह यंत्र बनाने की तकनीकी सिखाएंगे।
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