कुरुक्षेत्र। लंबी जद्दोजहद और कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार आज प्रदेश के सिखों को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी मिलेगी, जिसके लिए चुनाव होगा। ये चुनाव न केवल प्रदेश की सिख राजनीति का भविष्य तय करेंगे बल्कि कई बड़े चेहरों की सिख राजनीति का दारोमदार भी इन चुनावों पर टिका है। चुनाव मैदान में उतरे चार सिख गुटों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। चुनाव सुबह आठ बजे से लेकर सायं पांच बजे तक होगा इसके बाद मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
प्रदेश के 22 जिलों में बनाए गए 390 बूथों पर करीब चार लाख मतदाता किसके सिर पर पहली कमेटी का ताज सजाएंगे यह चुनाव परिणाम के बाद पता चल पाएगा लेकिन सभी ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया हुआ है। यह चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं और इसके लिए चार गुट मुख्य तौर पर अपने-अपने संगठन के तौर पर मैदान में हैं जबकि ज्यादा संख्या आजाद प्रत्याशियों की है।
प्रदेश में अलग बनी पहली एडहॉक कमेटी के प्रधान रहे जगदीश सिंह झींडा पंथक दल झींडा ग्रुप के बैनर पर तो उनके साथ पहली कमेटी में उपाध्यक्ष एवं संघर्ष में सहयोगी रहे दीदार सिंह नलवी सिख समाज संस्था के अधीन खुद के साथ-साथ अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारे हुए हैं। वर्तमान एडहॉक कमेटी के अधीन धर्म प्रचार की कमान संभाल रहे जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल के संगठन को सीधे तौर पर मान्यता नहीं मिली है लेकिन वे आजाद तौर पर अपनी टीम के प्रत्याशियों को मैदान में उतारे हुए हैं। वहीं बलदेव सिंह कैमपुरा हरियाणा सिख पंथक दल के तौर पर अपनी टीम के साथ मैदान में हैं। सभी के लिए यह चुनाव जीतना प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है और इसी के चलते ही चुनाव से एक दिन पहले भी सभी धुरंधर अपनी-अपनी रणनीति के अनुसार जीत के प्रयास में जुटे रहे।
दादूवाल जहां सीधे तौर पर झींडा व बलदेव सिंह कैमपुरा को पंजाब के बादल गुट के तौर पर निशाने पर लिए रहे तो वहीं झींडा व नलवी के साथ कैमपुरा के निशाने पर वर्तमान एडहॉक कमेटी रही है। जमकर लगाए गए आरोपों के बीच संगत किसे महत्ता देगी, इस पर हर किसी की निगाहें टिकी है।
- प्रदेश में बनाए गए हैं 40 वार्ड
- 164 उम्मीदवार मैदान में उतरे
- चार लाख के करीब सिख मतदाता करेंगे मतदान
- सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक होगा मतदान
- मतदान के बाद मतगणना व परिणाम का एलान
- चुने जाने वाले 40 सदस्य ही नौ सदस्यों को भी करेंगे नामित
- नामित सदस्यों में तीन सामान्य, दो बीसी, दो एससी व तीन महिलाएं होंगी
बादलों के हाथ में कमान नहीं देगी संगत : दादूवाल
दादूवाल का कहना है कि उनकी ओर से चुनाव की तैयारी पूरी है और भरोसा है संगत गुरुघरों के सही संचालन के लिए उनके प्रत्याशियों पर भरोसा जताएगी। संगत बादलों के हाथ में हरियाणा के गुरुघरों को सौंपने वाली नहीं है। लंंबी लड़ाई के बाद जिनसे कब्जा छुड़वाया गया, उनके हाथों में फिर से गुरुघरों का संचालन दिया जाना किसी भी स्तर पर उचित नहीं है। हालांकि इसके लिए पंजाब के बादलों के साथ बलदेव सिंह कैमपुरिया व झींडा ने भी चंडीगढ़ के एक होटल में चार दिन पहले अंदरखाते गठजोड़ कर लिया है लेकिन यह काम आने वाला नहीं।
झींडा बोले, हमारा मुकाबला किसी से नहीं
जगदीश सिंह झींडा का कहना है प्रदेश की संगत जानती है कि अलग कमेटी के लिए किसने संघर्ष किया और कौन हकदार है। संगत गलत फैसला लेने वाली नहीं है। हमारा मुकाबला किसी भी गुट के साथ नहीं है बल्कि संगत हमें कमान सौंपने का मन बना चुकी है। अब मुकाबला महज हर बूथ पर वोट प्रतिशत बढ़ाने का है। हमने किसी गुट से कोई गठजोड़ नहीं किया है।
वर्तमान कमेटी के कारनामें संगत जान चुकी : नलवी
दीदार सिंह नलवी का कहना है कि चुनाव को लेकर हमारी तैयारी पूरी हो चुकी है। संगत वर्तमान सरकारी कमेटी से संबंधित लोगों को गुरुघरों का संचालन देने वाली नहीं है। यह कमेटी कुछ भी नहीं कर पाई। अब अलग कमेटी बन रही है तो सही हाथों में ही कमान सौंपेंगे। हमारे पक्ष में बेहद सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
वर्तमान कमेटी से जुड़े लोग घबराए : बलदेव
बलदेव सिंह कैमपुरा का कहना है कि वर्तमान कमेटी के लोग चुनाव में हार को देख घबरा चुके हैं और झींडा के साथ गठजोड़ करने का भ्रम फैलाने में लग गए हैं। यह कमेटी अपने समय में कुछ भी नहीं कर पाई और अब संगत ही सही फैसला लेगी।