कुरुक्षेत्र। कथा वाचन करती सुमन जाजू। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के ब्रह्मसरोवर तट के सामने श्री जयराम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय प्रसंग सुनाया गया।
कथावाचिका सुमन जाजू ने रुक्मिणी की अटूट भक्ति और विश्वास का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को ही अपना सर्वस्व मान लिया था। जब उनके विवाह का निर्णय किसी और से किया गया, तब उन्होंने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उन्हें अपने जीवन का उद्धार करने का निवेदन किया।
उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में वर्णन किया कि किस प्रकार श्रीकृष्ण ने आकर रुक्मिणी का हरण किया और उनसे विवाह कर सच्चे प्रेम और भक्ति की जीत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जहां सच्चा प्रेम और अटूट विश्वास होता है, वहां भगवान स्वयं मार्ग बनाते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रोताओं को संदेश दिया कि हमें भी अपने जीवन में भगवान के प्रति समर्पण की भावना और विश्वास रखना चाहिए। कथा के दौरान विवाह उत्सव को भजन-कीर्तन और मंगल गीतों के साथ अत्यंत आनंदपूर्वक मनाया गया। श्रद्धालु जय श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ झूम उठे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
कुरुक्षेत्र। कथा वाचन करती सुमन जाजू। विज्ञप्ति