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Kurukshetra News: किसानों ने धरना खत्म किया तो सात दिन बाद चल पाया शुगर मिल, 40 हजार क्विंटल गन्ने की हुई पिराई

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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद।
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प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने पर आखिरकार किसान आंदोलन खत्म करने पर राजी हुए। हालांकि किसानों ने यह मूल्यवृद्धि मात्र ढकोसला करार दी, लेकिन प्रदेश भर की शुगर मिलों के बाहर सात दिन से चलाया जा रहा आंदोलन समाप्त कर दिया, जिसके बाद शुगर मिल भी वीरवार शाम से चला दी गई। आंदोलन खत्म करने से पहले गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में वीरवार को सैनी धर्मशाला में बुलाई प्रदेश स्तरीय बैठक में मंथन किया गया तो बाद में आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया गया।
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार ने महज 10 रुपये बढ़ाकर किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है, लेकिन यह मूल्य भी किसानों द्वारा चलाए गए आंदोलन के चलते ही बढ़ाया जा सका है और यह किसानों की जीत है। अब किसान हित में ही आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया गया है, क्यों कि किसान ज्यादा दिनों तक गन्ना नहीं रख सकते और उन्हें इससे बड़ा नुकसान होगा। चढूनी ने कहा कि भले ही आंदोलन खत्म कर दिया है, लेकिन भाजपा सरकार का विरोध लगातार जारी रहेगा। उनकी मांग गन्ने का मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा गन्ने के मामले को लेकर जो भी आंदोलन चलाएगा वे पूरा सहयोग करेंगे।
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वीरवार रात से पुन : पेराई हुई शुरू
किसानों के आंदोलन के चलते शुगर मिल 20 जनवरी को बंद कर दिया गया था तो वहीं किसान मिल पर तालाबंदी के बाद बाहर धरना दिए हुए थे। 26 जनवरी को आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया गया तो शाम करीब साढ़े चार बजे गन्ना मिल में पहुंचना शुरू हुआ। देर रात पेराई शुरू हो पाई और पहले दिन 40 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की जा सकी। इस पेराई सत्र में शुक्रवार तक कुल 28 लाख 32 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है, जबकि लक्ष्य 80 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का है। उधर, अधिकारियों की माने तो किसानों का आंदोलन जल्द खत्म होने की उम्मीद थी, जिसके चलते मिल बंद होने के बाद पूरी तरह से सफाई नहीं की गई थी, जिसके चलते दोबारा मिल चलाने में कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। सफाई होने पर दोबारा मिल चलाया जाता तो 35 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान होता।
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