संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान संस्थानम में श्री कृष्ण कृपा तीर्थामृत मंदिरम् का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चारण के बीच रविवार को हुआ। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी गुरुशरणानंद, ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरुप तथा विवेक मुनि द्वारा श्री अमृत कुंड में देश की पवित्र नदियों, पौराणिक तीर्थों और कूपों का जलभराव किया।
गीता मनीषी ने बताया कि इस कुंड में 422 तीर्थीें, नदियों, कूपों का जलभराव किया गया है। गंगोत्री से 10 हजार लीटर जल लाकर इस कुंड में डाला गया है। सभी तीर्थों का यह जल प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेगा। स्वामी गुरुशरणानंद तथा ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि इससे जो लोग सभी तीर्थों की यात्रा नहीं कर सकते, उन्हें यह जल एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त हो सकेगा।
उधर श्री कृष्ण कृपा जीओ परिवार द्वारा आयोजित दिव्य गीता सत्संग में प्रवचन जारी रहे। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता कर्तव्य पलायनता से कर्तव्य परायणता की यात्रा है। जब अर्जुन ने शोक में डूबकर अपने कर्तव्य से पलायन किया। भगवान कृष्ण के मुख से गीता का उपदेश सुनने के पश्चात अर्जुन ने शरणागत होकर कहा कि हे ठाकुर जो आप कहोगे मैं वहीं करूंगा। इस प्रकार अर्जुन ने कर्तव्य परायणता को निभाया। गीता मनीषी ने कहा कि कुछ पाने के लिए पात्र का खाली होना जरूरी है।
मन से सभी प्रकार के विकार निकालकर मन को खाली करके ही कुछ प्राप्त किया जा सकता है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए मन से सभी विकार निकालने जरूरी है और प्रभु के शरणागत होना आवश्यक है। आज के प्रवचन में हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने गीता मनीषी से आशीर्वाद लिया और गीता जी की आरती में शामिल हुए।