कुरुक्षेत्र। देशभर में सोमवार 14 सितंबर से 10 दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर इस बार भगवान गणेश का आगमन रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग में होगा। मान्यता के अनुसार इन योगों को शुभ माना जाता है। इस दौरान गणेशजी की पूजा और स्थापना को सुख-समृद्धि तथा कार्यसिद्धि के लिए विशेष फलदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे प्रारंभ होगी। भगवान गणेश के जन्म को मध्याह्न काल से जोड़ने वाली धार्मिक परंपरा के अनुसार मध्याह्न व्यापिनी तिथि में गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी।
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स्थापना का मुहूर्त
सोमवार 14 सितंबर, मध्याह्न पूजा एवं स्थापना
सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक, अवधि: 2 घंटे 29 मिनट।
अमृत चौघड़िया: सुबह 6:05 से 7:38 बजे तक।
शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 से 10:43 बजे तक।
चतुर्थी तिथि सुबह 7:06 बजे से।
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गणपति स्थापना और पूजन की विधि
पंडित बलराज शर्मा ने बताया कि सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई कर चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। चौकी पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें और उनके सामने कलश रखें। दीपक जलाकर गणेशजी का ध्यान एवं संकल्प करें। गणेशजी को जल, पंचामृत और स्वच्छ जल से स्नान कराएं। वस्त्र, मौली, चंदन, अक्षत, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। पूजा के दौरान गणेशजी के मंत्रों का जाप और गणेश चालीसा अथवा गणेश स्तुति का पाठ करें। गणेशजी की आरती कर परिवार की सुख-शांति एवं मंगल की प्रार्थना करें।
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यह रहेगी गणपति पूजा सामग्री
गणेशजी की प्रतिमा, पूजा की चौकी और लाल/पीला वस्त्र, कलश, जल और नारियल,रोली, चंदन और अक्षत
मौली/कलावा, दूर्वा घास, लाल या पीले पुष्प, धूप और दीपक, घी/तेल और बत्ती, कपूर, पंचामृत की सामग्री फल एवं नैवेद्य, मोदक या बेसन के लड्डू पान, सुपारी और दक्षिणा पूजा सामग्री उपलब्ध न होने पर अनावश्यक दिखावा करने के बजाय श्रद्धा और स्वच्छता के साथ उपलब्ध सामग्री से पूजा की जा सकती है।
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चतुर्थी की शाम चंद्र दर्शन से बचें
धार्मिक स्त्रोतों के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर मिथ्या कलंक या झूठे आरोप की मान्यता प्रचलित है। इसलिए श्रद्धालुओं को 14 सितंबर की शाम चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी जाती है। गणेशोत्सव का समापन शुक्रवार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होगा। घरों और सार्वजनिक पंडालों में श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति, समृद्धि और विघ्नों के निवारण की कामना करेंगे।