कुरुक्षेत्र। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पुरातन संस्कृति को देख गदगद हो उठे। उन्होंने ओखली-मूसल चलाकर पारंपरिक तौर-तरीकों को करीब से जाना। वहीं, उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ ने भी परंपरागत हाथ की चक्की पर बाजरे का आटा पीसा।
दोनों ने ही पवेलियन में प्रदर्शित हस्तकला को करीब से देखा और संस्कृति को जीवंत कर रहे कलाकारों की सराहना की। ये मौका था अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत पुरुषोत्तमपुरा बाग के समक्ष सजाए गए हरियाणा पवेलियन का, जहां उपराष्ट्रपति रविवार काे अवलोकन करने पहुंचे थे।
उपराष्ट्रपति पुरातन संस्कृति को देख बेहद प्रभावित हुए और बोले, मजा आ गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को बताया कि राज्य की इस संस्कृति को संरक्षित करने के लिए बड़े और ठोस कदम उठाने होंगे तथा कलाकारों को प्रोत्साहित करना होगा। उपराष्ट्रपति ने पवेलियन का अवलोकन करते हुए स्थानीय कलाकारों की कला और शिल्प को सराहा। उन्होंने कलाकारों से बातचीत कर हरियाणवी परंपरा और संस्कृति के बारे में जानकारी ली और कहा कि हरियाणा की संस्कृति में अनोखी खूबसूरती और गहराई है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना आवश्यक है। इस दौरान गुड्डा-गुड़िया और फुलझड़ी खरीदी और परंपरागत गतिविधियों में भाग लेकर कलाकारों का मनोबल बढ़ाया और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल संस्कृति को संजोने में मदद मिलती है बल्कि कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
उपराष्ट्रपति ने पवेलियन में परंपरागत चक्की पर आटा पीसने की पुरातन संस्कृति को प्रदर्शित कर रही ज्योतिसर की रहने वाली बुजुर्ग महिला कला देवी से मुख्यमंत्री नायब सैनी के बारे में हरियाणवीं अंदाज में ही प्रतिक्रिया ली के ताई यू सीएम ठीक सै, आपकी पांव भी लेता है के नहीं...। बुजुर्ग महिला बोली ठीक सै, बहुत बढ़िया। इतने में उन्होंने उठकर सीएम को आशीर्वाद दिया तो सीएम ने भी उन्हें प्रणाम किया। इसी के साथ उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री की तारीफ भी की।
हस्तकला का ज्ञान है, अनपढ़ कैसे : धनखड़: पवेलियन में हिसार के फ्रांसी गांव की सरस्वती ने हस्तकला की स्टॉल लगाई है, जिनसे उपराष्ट्रपति ने गुड्डा-गुड़िया और फुलझड़ी खरीदी। महिला बोली मैं तो अनपढ़ हूं।
उपराष्ट्रपति बोले हस्तकला का ज्ञान है, उद्यमिता के राह पर चल रहे हो तो अनपढ़ कैसे। इस कला को जीवंत रखने में आपका बहुत योगदान है। वहां से खरीदारी कर कलाकार का मनोबल बढ़ाया तथा सराहना की। संवाद