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खामियां छिपाने के लिए विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय नहीं करवाते नैक मूल्यांकन

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कुरुक्षेत्र। अनेकों विश्वविद्यालय व महाविद्यालय अपनी खामियां छिपाने के चलते नैक से मूल्यांकन ही नहीं करवाते। कई संस्थानों को इस मूल्यांकन के प्रति जागरूकता भी अभाव बना रहता है, जिसका उन्हें बाद में खामियाजा भी उठाना पड़ता है।
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यह खुलासा नैक की डिप्टी एडवाइजर डॉ. प्रतिभा सिंह ने किया। केयू में मंगलवार को नैक की मान्यता को लेकर केयू में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए नैक की मूल्यांकन और प्रत्यायन प्रक्रिया विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय जागरूकता की कमी, शिक्षकों की कमी व अन्य कारणों के कारण नैक के मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं पाते।
वो सोचते हैं कि इतने लंबे चरण व कठिन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा। विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए यह सोचकर आगे जाते हैं कि उनका भविष्य किस उच्च ग्रेडिंग वाले संस्थान से संवरेगा, क्या जिस संस्थान में वे दाखिला ले रहे हैं वो मान्यता प्राप्त है, उसकी ग्रेडिंग क्या है। अत: समय पर अपने संस्थान की मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए आवेदन करें। इसके अतिरिक्त उन्होंने नैक मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित अहम जानकारी प्रदान की। डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि छात्र किसी भी संस्थान के प्रमुख स्टेक होल्डर होते हैं। उनके रोजगार एवं उचित अध्ययन के लिए नैक से जुड़ना जरूरी है ताकि उनका उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित हो सके।
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डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो मंजुला चौधरी ने कार्यशाला की विस्तृत रूपरेखा रखते हुए सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल से आपस में ग्रुप एवं क्लस्टर बनाकर नैक के समुचित क्रियान्वयन के लिए लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया। केयू के कला एवं भाषा संकाय के डीन प्रो. ब्रजेश साहनी ने केयू की सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (एसडीजी) इम्पैक्ट रिपोर्ट के बारे में बताया व इसके मुख्य 17 गोल्स की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान केयू कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।
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