कुरुक्षेत्र। प्रतिभागियों को संबोधित करते कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व मंचासीन अतिथि। स्वयं
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग और एलुमिनाई एसोसिएशन के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नैतिक शासन : विकसित भारत के लिए एक नीडोनॉमिक्स फ्रेमवर्क विषय पर चौथे वार्षिक प्रो. पीसी जैन मेमोरियल व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, शासन और विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स आज शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों को तेजी से बदल रहे हैं। युवाओं से आह्वान किया कि भविष्य के लिए तैयार और आत्मनिर्भर बनने के लिए इन आधुनिक तकनीकों की समझ अब बेहद आवश्यक है।
एआई अब कोई वैकल्पिक तकनीक नहीं रही बल्कि कार्य-दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रणेता एवं स्टारेक्स विश्वविद्यालय गुरुग्राम के पूर्व कुलपति प्रो. एमएम गोयल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दक्षता, पारदर्शिता, लक्षित कल्याण और परिणाम-आधारित बजट के लिए अपार संभावनाएं रखता है। उन्होंने चेताया कि इससे नौकरी छूटने, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, अत्यधिक निगरानी और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर नैतिक जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।
ये चुनौतियां तकनीकी नहीं बल्कि शासन में लालच की विफलताएं हैं। प्रो. गोयल ने निष्कर्ष दिया कि एआई शासन और आर्थिक समावेशन के लिए शक्ति गुणक हैं। डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि प्रो. केके अग्रवाल ने प्रो. पीसी जैन को श्रद्धांजलि दी और एआई के इतिहास और भारतीय संदर्भ में सुरक्षित व विश्वसनीय एआई की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस दौरान एमए इकोनॉमिक्स में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर वर्ष 2024 के लिए रिया और वर्ष 2025 के लिए नेहा पराशर को मेवावती गोयल अवॉर्ड प्रदान किया गया।