कुरुक्षेत्र। बनारस की शिल्पकला की अपनी पहचान है, जो अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में भी विशेष जगह बनाए हुए है। इस शिल्पकला को देख पर्यटक गदगद है तो वहीं शिल्पकारों को भी अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। शिल्पकार खलीकुलजामा का कहना है कि इस मेले में आने के लिए हमेशा मन में उत्सुकता रहती है। महोत्सव में प्रदेश की बेटियों और महिलाओं के लिए बनारसी हैंडबैग बनाकर लाए हैं। इन हैंडबैग की कीमत महज 50 रुपये से लेकर 150 रुपये तय है। हालांकि महिलाओं के लिए बनारसी साड़ी और सूट भी विशेष तौर पर लाए है।
शिल्पकार खलीकुलजामा ने स्टॉल नंबर 64 पर बेटियों के लिए बनारसी हैंडबैग सजाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से गीता महोत्सव में आ रहे है। कई बार आवेदक ज्यादा होने के कारण उनकी बारी नहीं आ पाई, लेकिन इस बार एनजेडसीसी की तरफ से एक बार फिर से गीता महोत्सव में आने का अवसर मिला है। उनकी बनारसी कपड़ा बनाने की शिल्पकला पुश्तैनी है और वे स्वयं वर्ष 2012 से बनारसी कपड़ा तैयार करने का काम कर रहे हैं और तभी से इस महोत्सव में बनारसी साड़ी, कपड़ा, सूट व दुपट्टा लेकर आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में बनारसी कपड़े से बनीं साड़ियां, सूट, दुप्पटे, डाइनिंग टेबल के रनर विशेष तौर पर लाए है। इस महोत्सव में बनारसी कपड़े से बने हैंडबैग पहली बार लाए है और इनके दाम भी केवल 50 रुपये से लेकर 150 रुपये तय किए है। बनारसी साड़ियों के दाम 800 रुपये से लेकर 4500 रुपये तथा सूट के दाम लगभग 1250 रुपये रखे है। इन दामों पर पर्यटक सहजता से बनारसी कपड़े से बने उत्पादों को खरीद सकता है।