उत्तराखंड के घसियारी लोक नृत्य के कलाकारों ने जबरदस्त प्रस्तुति देकर पर्यटकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोक कलाकारों ने उत्तराखंड के इस लोक नृत्य के जरिये गांव नाटी से कैलाश पर्वत तक की 12 हजार किलोमीटर तक की यात्रा के एक-एक क्षण का व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कुरुक्षेत्र उत्सव गीता जयंती समारोह के छठे दिन ब्रह्म सरोवर के महिला घाट पर बाकी दिनों से कुछ हट के उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। इन कलाकारों ने अपने लोक नृत्य घसियारी की प्रस्तुति दी। नृत्य को उत्तराखंड के नाटी गांव में नंदा देवी की आराधना में प्रस्तुत किया जाता है।
इन लोक कलाकारों के साथ नाटी गांव से पहुंचे एल नटियाल का कहना है कि उत्तराखंड के गांव नाटी जिला चंबोली में खाटू (चार सींगों वाली भेड़) के पैदा होने पर 12 साल तक पाल-पोस कर बड़ा किया जाता है और इसके पश्चात गांव नाटी से लेकर कैलाश पर्वत तक 12 हजार किलोमीटर लंबी यात्रा को 27 दिन में पूरा किया जाता है।
जब खाटू एक जिवशेष स्थान पर पहुंच कर पीछे मुड़कर इशारा करता है तो लोग उसी जगह पर खड़े होकर खाटू को निहारते रहते हैं और खाटू देखते ही देखते आंखों से ओझल हो जाता है। जैसे ही खाटू आंखों से ओझल हो जाता है और नाटी गांव के आसपास किसी भी गांव में दोबारा खाटू जन्म लेता है।
इस परंपरा का पालन सदियों से किया जा रहा है और इस संस्कृति को कलाकारों ने घसियारी लोक नृत्य के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया। इसके अलावा जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल और राजस्थान के कलाकारों ने भी लोगों का खूब मनोरंजन किया।
इसी मंच पर बाजीगरों ने भी अपनी कलाओं को दिखाया। इन कार्यक्रमों को एक सूत्र में पिरोने का काम फिल्मी कलाकार चन्नी शर्मा ने किया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कार्यक्रम अधिकारी जरनैल सिंह ने बताया कि 17 दिसंबर से करीब 12 प्रदेशों के लोक कलाकार गीता जयंती समारोह में पहुंच रहे हैं। ये कलाकार 21 दिसंबर तक लोगों का मनोरंजन करेंगे।