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श्रद्धालुओं को भक्ति का महत्व बताया

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राजा परीक्षित को श्राप की कथा का वर्णन करते कथावाचक। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष्य मेें सेक्टर-13 स्थित कांग्रेस भवन में चल रही श्रीमद्भागवद कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथावाचक पंडित पवन भारद्वाज ने भक्ति का महत्व बताया। कथावाचक ने कहा कि कलयुग के प्रभाव के कारण राजा परीक्षित को ऋषि की ओर से श्राप दिया जाता है। श्राप के निवारण के लिए राजा परीक्षित महात्मा शुकदेव के पास जाते हैं। महात्मा शुकदेव राजा परीक्षित को भक्ति से पश्चाताप करने का मार्ग दिखाते हैं।
कथावाचक भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं है, लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित करना जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। उन्होंने पांडवों के जीवन में होने वाली श्री कृष्ण कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से सुनाया। कहा कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है।
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द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्य की उपासना करके अक्षय पात्र की प्राप्त किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। उसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता, मगर वह हर जीव में बसता है। रघुनंदन शर्मा ने भजन गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर बीपी जिंदल, रघु शर्मा, अमन शर्मा, शंकर शर्मा, डॉ महेश शर्मा, लाला महेश आदि मौजूद रहे।
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