अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के पावन पर्व पर ब्रह्मसरोवर के तट पर गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित निकटवर्ती राज्यों की हजारों से ज्यादा महिलाओं ने पवित्र ग्रंथ गीता को जन-जन की गीता बनाने का संकल्प लिया। इन महिलाओं ने संकल्प लेने के साथ-साथ पवित्र ब्रह्मसरोवर की परिक्रमा की।
देश की मातृ शक्ति को ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर एकत्रित करने का गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने आह्वान किया था। इस आह्वान के बाद गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित प्रदेश के नगरों व उपनगरों से शुक्रवार को हजारों से ज्यादा महिलाएं एकत्रित हुईं। एक साथ हजारों महिलाओं के पीले वस्त्रों से ब्रह्मसरोवर का वातावरण भी चारों तरफ से स्वर्णीय नजर आने लगा था। मातृ शक्ति ने भीम घाट से परिक्रमा को शुरू किया। इन महिलाओं के आगे भगवान ठाकुर जी व पवित्र ग्रंथ गीता की पालकी थी। सभी ने पवित्र ग्रंथ गीता और ठाकुर जी की पूजा-अर्चना करने के बाद परिक्रमा को शुरू किया था।
उधर, गीता ज्ञान संस्थानम केंद्र में आयोजित भजन संध्या में प्रसिद्घ गायक नंद किशोर भाई ने प्रस्तुति दी। भजन संध्या का शुभारंभ गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने किया। नंद किशोर ने आपके श्री चरणों में उम्र कट जाएगी, शाम तेरा की लगदा आदि भजनों की प्रस्तुति करके सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान गीता ज्ञान संस्थानम में आयोजित मातृशक्ति सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें प्रवचन करते हुए स्वामी ज्ञानानंद कहा कि हिंदू परंपरा में नारी शक्ति को शुरू से ही सम्मान दिया गया है। हर अवतार से पहले नारी शक्ति का नाम लिया जाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ करनाल की मेयर रेणु बृज गुप्ता, रेडक्रॉस हरियाणा की वाइस चेयरमैन सुषमा गुप्ता, प्रो. शुचि स्मिता, मधु शर्मा दिल्ली ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। पठानकोट निवासी शोभा पाराशर ने मंच संचालन किया, जबकि दिल्ली से आई भजन गायक अलका गोयल ने भजन सुनाकर उपस्थित महिलाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।