पितृ पक्ष की सोमवती अमावस्या के अवसर पर गीता नगरी के सरोवर में हजारों श्रद्धालुओं ने अव्यवस्थाओं के बीच श्रद्धा की डुबकी लगाई और अपने पूर्वजों का तर्पण किया। श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि रविवार को ही धर्मनगरी की सभी धर्मशालाएं श्रद्धालुओं से भर गई थी। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सोमवार को करीब 70 हजार श्रद्धालुओं ने आस्था के चलते ब्रह्म सरोवर और सन्निहित सरोवर पर डुबकी लगाई।
इस दौरान उन्होंने पितरों को जल दिया और उनका आशीर्वाद लिया। तीन वर्ष बाद पितृ पक्ष में सोमवती अमावस्या के कारण उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने केडीबी विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी। केडीबी अधिकारियों ने सरसरी तौर पर सभी अधिकारियों को अमावस्या को लेकर निर्देश जारी कर दिए, लेकिन उन पर अमल नजर नहीं आया।
शहर की सड़कों पर भारी भीड़ रही
हुआ यूं कि रात से ही श्रद्धालुओं का धर्मनगरी में आना शुरू हो गया था। एक आंकड़े के अनुसार रविवार रात में ही 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु रात में ही गीता नगरी में पहुंच गए थे। रात भर रेलवे रोड और अपने वाहनों में लोगों का आना जारी रहा। सुबह होते ही यह भीड़ दो से तीन गुना ज्यादा बढ़ गई थी। सोमवार को देर शाम तक भी श्रद्धालुओं का आना जारी रहा। हालात ये थे कि ब्रह्म सरोवर और उसके आसपास के रोड पर वाहनों की नो इंट्री रही जबकि सन्निहित सरोवर भी भारी भीड़ मौजूद रही। आलम ये था कि अलसुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में स्नान करना शुरू कर दिया था।
शहर के चारों तरफ रही जाम की स्थिति
जिला प्रशासन को अमावस्या के तौर पर होने वाली हजारों की भीड़ का अंदाजा था लेकिन फिर भी वे इंतजाम करने में असफल साबित रही। शहर के बीआर इंटरनेशनल चौक, सेक्टर-13 अग्रसेन चौक, बिरला मंदिर चौक सहित अनेक चौक पर अव्यवस्था हावी रही। इन चौकों पर पुलिस होने के बावजूद श्रद्धालु सरोवर में जाने के लिए जद्दोजहद करते नजर आए और करीब प्रत्येक चौक पर कई मिनट तक के लिए जाम में फंस गए।
सरोवर में नहीं मिला साफ पानी
श्रद्धा की डुबकी लगाने वाले लोगों को अपने पूर्वजों को तर्पण देने के लिए ब्रह्म सरोवर व सन्निहित सरोवर में साफ पानी भी मुनासिब नहीं हुआ। श्रद्धालुओं ने काई से हरे हो चुके सरोवर के पानी में ही डुबकी लगाई और तर्पण किया। अमावस्या के समय सरोवर में साफ पानी के मामले में भी केडीबी प्रशासन सुस्त नजर आया जिसका खामियाजा श्रद्धालुओं को झेलना पड़ा।
भंडारों के बाद गिराए पत्तल
सोमवती अमावस्या के चलते शहर भर में भंडारों का आयोजन किया गया। वहीं ब्रह्म सरोवर के आसपास लोगों ने भंडारे आयोजित किए हुए थे, लेकिन भंडारे के बाद सरोवर परिसर के पास गंदे पत्तल दिखाई दिए। जिन्हें उठाने वाला कोई भी दिखाई नहीं दिया।
पहली बार साधु रहे घाट से दूर
ऐसा पहली बार हुआ है कि जिला पुलिस की मौजूदगी के कारण सरोवर के घाट से साधु नदारद रहे। अन्यथा पहले अमावस्या के दौरान साधु व दान लेने वाले घाट के पास ही डेरा जमाकर रखते थे, जिससे घाट पर काफी अव्यवस्था का माहौल बना रहता था।